न्यूड भाभी सेक्स स्टोरी में मेरी चचेरी भाभी मस्त माल हैं. उनकी शादी को कुछ महीने ही हुए थे. एक बार भाभी और मैं घर में अकेले थे. तो भाभी ने मुझसे ख़ास बात की.
दोस्तो, मैं लक्की.
मेरी हाइट 5 फीट 10 इंच है और मैं स्कूल की बड़ी कक्षा में पढ़ता था.
मेरे घर में मैं और मेरे माता-पिता ही रहते हैं.
आज मैं आपको अपनी पहली चुदाई की कहानी सुनाने जा रहा हूँ.
इस न्यूड भाभी सेक्स स्टोरी में मैंने नाम बदल दिए हैं, बाकी सब सच है.
यह घटना कुछ साल पहले की है.
तब मैं गांव में रहता था.
बचपन से ही मैंने खेतों में खूब काम किया है, इसलिए शरीर भी अच्छा तगड़ा हो गया है.
हर कोई मुझे पहलवान कहता है और मेरा हथियार भी मूसल जैसा है.
मेरे पड़ोस में मेरे कजिन रहते हैं.
उनका नाम रमेश भैया और सांची भाभी है.
यह मेरी सेक्स स्टोरी मेरी सांची भाभी के साथ हुई थी यानि वे ही इस सेक्स कहानी की हीरोइन हैं.
भाभी एकदम अप्सरा जैसी लगती हैं.
उनकी उम्र 28 साल की है और वे एकदम दूध सी गोरी हैं.
वे इतनी ज्यादा गोरी हैं कि उन्हें कोई छू भर ले तो समझो दाग लग जाए.
भाभी की हाइट 5 फीट 5 इंच की है.
उनके 34 इंच के एकदम सख्त और उठे हुए दूध ऐसे लगते हैं मानो दूध के दो टैंक मर्द के लंड को और मुँह को ललचा रहे हों.
सांची भाभी की 30 इंच की लचकती हुई कमर और 36 की गोल-मटोल गांड ऐसी थिरकती है, जो किसी बूढ़े को भी अपने वश में करके गुलाम बना ले.
ऐसी मस्त माल हैं मेरी सांची भाभी!
उनका और मेरा घर आपस में लगा हुआ है और हमारे खेत भी आस-पास ही थे.
सब कुछ अच्छा चल रहा था.
भाभी मुझे बहुत छेड़ा करती थीं और मैं भी उनसे थोड़ी-बहुत मज़ाक कर लिया करता था.
एक दिन मां ने बताया कि मेरी दीदी के ससुर नहीं रहे, इसलिए अब उन्हें कुछ दिनों के लिए वहां जाना होगा.
फिर मां ने सांची भाभी को घर बुलाया और पूरी बात बताते हुए कहा कि सांची, लक्की का ध्यान रखना.
भाभी ने हां बोलते हुए कहा- इन्हें भी आपके साथ दीदी के घर जाना है तो मुझे भी लक्की की जरूरत पड़ेगी.
इसके बाद मां, पिताजी और रमेश भैया तीनों चले गए.
फिर भाभी ने मुझे दोपहर के खाने के लिए बुलाया.
मैं भी चला गया.
उनके घर में सांची भाभी की सास यानि मेरी ताई भी रहती हैं.
वे काफी उम्र वाली हो गई हैं तो उन्हें ज्यादा सुनाई दिखाई नहीं देता है.
वे अपने कमरे में ही लेटी रहती हैं.
खाना खाने के बाद मैंने कहा- मुझे खेत में पानी देने जाना है.
भाभी ने कहा- मुझे भी पानी देने जाना है. तुम्हारे भैया ने कहा है कि लक्की के साथ अपने खेतों में भी पानी दे देना. खेत प्यासे हो गए होंगें!
इतना कहकर भाभी ने मुझे आंख मारी और मेरे साथ खेत की तरफ चल दीं.
खेत पहुंच कर भाभी ने कहा- लक्की मैं तुम्हारे साथ कुछ ज़रूरी बात करने आई हूँ. क्या तुम पर विश्वास कर सकती हूँ या नहीं?
मैंने भाभी से कहा- क्या बात है भाभी? जरा खुलकर बताओ ना!
फिर उन्होंने कहना शुरू किया कि मेरी शादी को 4 साल हो गए हैं और मैं अभी तक मां नहीं बन पाई हूँ. क्योंकि तुम्हारे भैया का सामान (लंड) कमज़ोर है. उनका वह मेरे अंगूठे जितना ही है और 10 सेकंड भी नहीं टिकता है.
मैं मुँह खोले भाभी की बात को सुन रहा था.
भाभी इतनी बिंदास आज से पहले कभी नहीं हुई थीं.
वे बोली- डॉक्टर ने कहा था कि बच्चा चाहिए तो कोई और उपाय करना ही पड़ेगा. पर इसमें बदनामी का डर था. इसलिए मैं तुम्हारे बारे में सोचकर 4 दिन पहले डॉक्टर के पास गई थी इलाज के लिए .. ताकि सभी को लगे कि मैंने दवा की मदद से बच्चा पैदा कर लिया है. जबकि ऐसा नहीं हुआ है … अब मुझे तुमसे एक बच्चा चाहिए!’
यह कह कर भाभी ने एक लंबी सांस भरी और मेरी तरफ देखने लगीं.
मैं अवाक मुद्रा में उन्हें ही देख रहा था.
भाभी- इसके लिए तुम जो चाहो मांग लो. मैं सब कुछ देने को तैयार हूँ. पर मुझे इस बांझपन के कलंक से मुक्ति दिला दो लक्की, आज तुम मुझे चोदकर बस मां बना दो!
इस तरह चुदाई की साफ बात सुनकर मेरे लंड में हरकत शुरू हो गई.
फिर भाभी ने बताया कि उन्होंने मेरे लंड के बारे में रमेश भैया से सुन रखा है कि तुम्हारा लोहे सा सामान कितना विशाल है.
यह सुनकर मैं चुप हो गया क्योंकि भैया और मैं खेतों में काम करते वक्त नंगे हो कर कई बार नहाये थे तो वे मेरे मूसल लंड को देख चुके थे.
मेरी भाभी ने देर न करते हुए मेरे करीब आकर मेरे होंठों पर अपने गुलाबी होंठ रख दिए और किस करने लगीं.
इसमें मैं भी उनका साथ देने लगा.
किस करते-करते भाभी ने मेरे हाथों को अपने मुलायम दूध के टैंकों पर रखा और कहा- दबाओ इन्हें!
कुछ देर किसिंग के बाद मैं अनायास ही अपने होंठ नीचे को लाकर उनके दूध की तरफ आ गया और कपड़े के ऊपर से ही दूध को दबाने और चूसने लगा.
भाभी मीठी मीठी सीत्कार भरने लगीं- आह ह्ह् उम्म्म चूस लो आह … मस्त लग रहा है!
यह कहते हुए भाभी ने अपने ब्लाउज को बिना खोले ही ऊपर उठाया और एक दूध मेरे मुँह में दे दिया.
मैंने उनके ब्लाउज को दूसरी तरफ से भी उठाया और दूसरे दूध को मसलते हुए एक दूध को चूसने लगा.
भाभी ने मेरे बालों में हाथ फिराते हुए मेरे सर को अपने स्तनों पर दबाना चालू कर दिया और इस तरह से मैंने भाभी के दोनों चूचों को खूब चूसा.
अब वे बोलीं- नीचे चुत भी होती है देवर जी!
यह सुनकर मैंने उनकी साड़ी को धीरे से ऊपर कर दिया और खुद झुक कर उनकी चूत को मसलने लगा.
भाभी ने मेरे सर को दबा कर इशारा किया तो मैं घुटनों के बल बैठ गया और उनकी चुत को चाटने लगा.
चुत पर मेरी जीभ का स्पर्श पाते ही भाभी ने झट से अपनी साड़ी खोल दी और मुझे खड़ा कर दिया.
मैं खड़ा हुआ तो भाभी ने मेरे पैंट को खोला और लंड को बाहर निकाल लिया.
पहले तो लंड देख कर भाभी ने डर के मारे अपना हाथ पीछे कर लिया और वे मुझसे दूर होने लगीं.
मैंने कहा- क्या हुआ भाभी?
भाभी कहने लगीं- तुम्हारे इस अजगर से तो मेरी चूत फट जाएगी और जो न फटी तो भोसड़ा बन जाएगी!
मैंने कहा- तो बीज कैसे बुवबाओगी?
भाभी ने सर हिलाते हुए कहा- हां, मुझे बच्चा भी तो इससे ही मिलने वाला है.
मैंने कहा- तो इसी को अन्दर लेना पड़ेगा!
भाभी ने मुझसे रुकने को कहा और पूछा- इससे पहले तुमने किसी के साथ चुदाई की है क्या?
मैंने कहा- नहीं भाभी यह तो मेरा पहली बार है यानि कि सब कुछ आपको ही सिखाना पड़ेगा.
इस बार भाभी ने हंस कर कहा- अनाड़ी का चोदना और चूत का सत्यानाश … यह कहावत तो सुनी ही होगी?
मैंने कहा- भाभी, आप लंड चुत में लेने की सोचो, कहावतों को भूल जाओ.
वह मेरे लंड को पकड़ कर सहलाने लगीं और कुछ कुछ बुदबुदाने लगीं.
मैंने पूछा- क्या बुदबुदा रही हो आप!
वे कहने लगीं- कुछ नहीं मेरे भोले-भाले देवरजी अब मुझे तुम्हें चुदाई सिखानी ही पड़ेगी.
मैंने कहा- हां तो फिर शुरू हो जाओ!
भाभी बोलीं- अभी नहीं, आज हम दोनों अपनी चुदाई को यादगार बनाएंगे. कल रात में सही से चुदाई करेंगे.
मैंने कहा- ठीक है.
उस समय बस इतना ही हुआ और मैं पानी देने के बाद मचान पर चढ़ कर नंगा ही सो गया.
हम दोनों के खेतों में मचान बने हैं ताकि रात में सोते समय किसी जंगली जानवर से बचा जा सके.
जब मेरी नींद खुली तो भाभी अपने वाले मचान पर नहीं थीं.
मैंने आस-पास देखा तो भाभी फूल तोड़ रही थीं.
फिर मैं नंगा ही मचान से नीचे आ गया और भाभी से पूछा- अब किसकी पूजा करेगी?
भाभी ने हंस कर कहा- मेरे नए पतिदेव के दमदार लंड की और किसकी!
इतना कहकर भाभी ने मेरे लंड पर चिमटी काट दी.
मैंने भी भाभी के दूध को पकड़ कर मसल दिया तो भाभी ‘आह’ करके चीख पड़ीं.
कुछ देर बाद भाभी ने ढेर सारे फूल मुझे दिए और कहा- इन्हें ऊपर अपने मचान में रख दो, फिर हम घर चलते हैं.
मैंने वैसा ही किया.
फिर कुछ खाना कुत्तों को खिला दिया जो मेरे खेत की चौकीदारी करते हैं और हम दोनों घर वापस आ गए.
रास्ते में भाभी ने बताया- तुम जल्दी से पहले खाना खाने आ जाना और नीचे के बाल साफ कर लेना. मैं भी कर लूंगी.
मैंने कहा- मुझे नहीं आता.
इस पर भाभी ने कहा- ठीक है. मैं तुम्हारे घर चलकर पहले यही काम करती हूँ, फिर अपने घर जाऊंगी.
मैंने कहा- किधर करेंगे?
वे हंस दीं और बोलीं- बाथरूम में चलो.
हम दोनों मेरे घर के बाथरूम में घुस गए.
भाभी ने पहले मेरे लंड के चारों तरफ साबुन लगाया और रेजर से झांटों के बाल साफ किए.
जब वे मेरे लवड़े को पकड़ कर मेरे बाल साफ कर रही थीं तो मुझे बड़ा ही अच्छा लग रहा था.
मैं उनके दूध सहलाते हुए मसल रहा था.
कुछ देर बाद भाभी ने लंड को चिकना कर दिया और पानी से धोकर उसे एक बार मुँह में लेकर चूस दिया.
मेरी आह निकल गई और भाभी ने हंस कर लंड को मुँह से निकाल दिया.
अब वे खुद नंगी हुईं और उन्होंने अपनी टांगें फैला कर अपनी झांटों वाली चुत खोल ली.
मैंने उंगली से चुत के दाने को सहलाया तो भाभी को मजा आया.
वे बोलीं- अब अपने हाथ से मेरी चुत के बालों में साबुन लगाने को कहा. मैं उनकी चुत पर हथेली से साबुन लगाने लगा और उनकी चुत के बाल साबुन के फैन से झाग वाला बना दिया.
भाभी ने रेजर से चुत की झांटों को साफ किया और चुत के ऊपर एक दिल के आकार की डिजायन भी बना दी.
उसके बाद हम दोनों साथ में नहाये.
अब भाभी जल्दी से घर जाने लगीं और मुझे तुरंत अपने घर आने की कहकर चली गईं.
मैंने कपड़े पहने और उनके घर आ गया.
हम दोनों ने खाना खाया.
उधर उनकी सास भी थीं तो हम दोनों बड़ी शालीनता से सब कर रहे थे.
फिर भाभी ने अपनी सास को बताया कि खेत में पानी देना अभी बाकी है, आज रात में ही पूरा करना पड़ेगा.
उनकी सास ने पूछा- तू अकेली कैसे करेगी?
भाभी ने कहा- मैं लक्की को लेकर अभी जा रही हूँ. काम होते ही हम दोनों वापस आ जाएंगे. यदि रात ज्यादा हुई तो मचान पर ही सो जाऊंगी.
इतना कहकर भाभी ने अपने कमरे से एक पोटली उठाई और बोलीं- चलो देवर जी.
कुछ देर बाद हम लोग खेत में पहुंच गए.
फिर भाभी ने कहा- मैं ऊपर जाकर तैयारी करती हूँ और तुम एक बार खेतों के चक्कर लगाकर आ जाओ. हां, आते टाइम अच्छे से हाथ-मुँह धोकर ऊपर आना और बाड़ का फाटक बंद करके आना. ताकि कोई रात में हमें डिस्टर्ब न करे.
इतना कहकर भाभी ऊपर मचान पर चली गईं और मैं खेत में पानी लगाने चला गया.
आधा घंटा तक सब काम सैट करने के बाद हाथ-मुँह धोकर मैंने भाभी को आवाज लगाई और उनसे ऊपर आने को पूछा.
उन्होंने कहा- अभी थोड़ी देर नीचे ही रहो. जब मैं कहूँ तभी आना.
शाम ढल गई थी तो अंधेरा होने लगा था, तो मैं नीचे की लाइट चालू करके इंतज़ार करने लगा.
कुछ देर बाद भाभी ने मुझे आवाज़ लगाई- अब ऊपर आ जाओ देवर जी!
जैसे ही मैं ऊपर गया, पर्दा हटाते ही चौंक गया. भाभी ने यह कौनसा रूप धारण कर लिया था?
भाभी तो एकदम दुल्हन के जैसी तैयार होकर अप्सरा लग रही थीं.
उन्होंने बिस्तर पर फूल बिछाए हुए थे.
उन्होंने मुझे भी पहनने के लिए कुर्ता-पायजामा दिया और कहा- तुम भी चेंज कर लो.
मैंने वैसा ही किया.
मैं रेडी हो गया और भाभी को ही देखे जा रहा था.
भाभी इतनी सुंदर तो कभी लगी ही नहीं थीं.
भाभी ने कहा- आज अभी हम दोनों पहले शादी करेंगे और फेरे लेंगे. तुम आग की व्यवस्था करो.
मैंने उधर ही रखी एक बाल्टी में भूसा और लकड़ियां डाल कर उसमें आग जला ली.
यह सब व्यवस्था सर्दी से बचने के लिए मचान पर रखना पड़ती थी.
अब हम दोनों ने अग्नि के 7 फेरे लिए.
भाभी ने मुझे मंगलसूत्र दिया और कुमकुम की डिब्बी देते हुए कहा कि मुझे मंगलसूत्र पहनाओ और मेरी मांग भरो!
मैंने उनके गले में मंगलसूत्र पहनाया, मांग भर दी.
भाभी ने मेरे पैर छुए और कहा- अब हम अपनी सुहागरात मनाएंगे.
मैं भाभी को किस करने लगा.
फिर एक-एक करके मैंने उनके सारे कपड़े उतार दिए और उन्होंने मेरे भी कपड़े उतार दिए.
मद्धिम लाइट की रोशनी में भाभी का गोरा नंगा बदन संगमरमर की मूर्ति की तरह चमक रहा था.
मैं उन्हें निहार रहा था.
सुंदर माथे पर बिंदी, गाल लाल जैसे सारे जहां की लालिमा समा गई हो.
होंठ जैसे गुलाब की पंखुड़ियां हों.
उनका पूरा चेहरा लाज से लाल हो गया था.
भाभी के नग्न जिस्म में उनकी सुराहीदार गर्दन मस्त लग रही थी और गर्दन के नीचे उनके दो-दो लीटर के दूध से भरे टैंकर पूरी तरह से उठे हुए थे और मानो मुझे सलामी दे रहे थे.
मम्मों के नीचे उनका एकदम सपाट सा पेट और उसके नीचे अभी-अभी झांट रहित छोटी सी प्यारी सी चिकनी चूत थी.
भाभी की चुत के नीचे केले के तने जैसी दो चिकनी-चिकनी टांगें थीं.
तभी भाभी घूमीं तो उनके पीछे ऊपर को उठी हुई गांड के दोनों गोले मेरे कलेजे को चाक करने लगे थे. उनके चूतड़ जैसे किसी ने दो फुटबॉल को बीच से काटकर पिछवाड़े में लगा दी हों.
न्यूड भाभी सेक्स के लिए तैयार थी और उनका नंगा बदन देखकर मेरा लंड पूरा खड़ा होकर तैयार था.
जैसे ही भाभी ने मुझे आवाज़ दी- अजी कहां खो गए?
उन्होंने मेरे पास आकर मुझे अपनी बांहों में भर लिया.
हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे.
मैं उनके एक दूध को धीरे-धीरे दबाने लगा और दूसरे को पीने भी लगा.
वे भी मुझे दूध चुसवाती हुई मेरे लंड पर हाथ चलाने लगीं.
भाभी मेरे मुँह में निप्पल देती हुई कहने लगीं- देखो प्राणनाथ, अभी मेरी चूत का उद्घाटन भी नहीं हुआ है. आज आपके द्वारा मेरी चूत का उद्घाटन होने वाला है. इसमें मुझे दर्द होगा, पर आप मेरी जरा भी फिक्र मत करना. अपना मूसल मेरी चूत में पूरा घुसा कर ही दम लेना … फिर चाहे मैं कितना भी मना करूँ, रोऊं या आपको दूर हटाऊं … समझ गए न?
मैंने पूछा- भाभी ऐसा क्यों?
तो भाभी बोलीं- पहले तो मुझे भाभी कहना बंद करो क्योंकि अब मैं आपकी पत्नी हूँ. सबके सामने भले ही आप मुझे भाभी बोल लेना, पर अभी या जब हम दोनों हों तब तो आप मुझे मेरे नाम से ही पुकारना. ठीक है न मेरे स्वामी?
मैंने कहा- ठीक है सांची.
भाभी बोलीं- सांची या …
मैंने कहा- मेरी जान!
वे हंस दीं.
दोस्तो, आज रात सांची भाभी की चुत चुदाई होनी है और मैं उनकी चुदाई की कहानी को विस्तार से अगले भाग में लिखूँगा.
आप अपने मेल व कमेंट्स लिख कर बताएं कि आपको मेरी यह न्यूड भाभी सेक्स स्टोरी कैसी लग रही है.
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