चचेरे भाई से कुंवारी बुर की सील तुड़वाई

Views: 0 Category: Brother-Sister By dhananjaybpatil353 Published: August 28, 2026 📖 14 min read
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हॉट सिस्टर सेक्स कहानी में मेरा चचेरा भाई गाँव में, मैं शहर में पढ़ती थी. छुट्टियों में मैं गाँव आई तो भाई का जिस्म देख मेरा बुर गीली हो गयी. मैंने कभी सेक्स नहीं किया था.

नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम खुशी है.
मेरी उम्र 20 साल है और मेरा भाई मुझसे एक साल छोटा है. उसका नाम सूरज है.

मैं शहर में रह कर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही हूँ.
जबकि वह गांव में ही रह कर कंपटीशन की तैयारी कर रहा है.

मैं आज आपको मेरे और अपने चचेरे भाई के साथ की सच्ची हॉट सिस्टर सेक्स कहानी बताने जा रही हूँ.

मेरे चाचा का लड़का सूरज मुझे बचपन से बहुत पसंद था.
वह अच्छा खासा पहलवान है और मुझे बाद में पता चला था कि वह गांव की अनेकों औरतों को अपने लंड पर झूला झुला चुका था.

सूरज जब भी मेरे सामने आता, मेरे मन में अलग सी लहर उठती थी.

जब मैं दीवाली की छुट्टियों में घर आई थी, तब मेरी मां और मेरे पापा मेरे मामा के घर गए थे.
घर में सिर्फ मैं और मेरे दादाजी थे.

जब घर में कोई नहीं रहता या फिर मेरे दादाजी अकेले रहते तो मैं सूरज को घर पर रहने के लिए बुला लेती थी.
उस वक्त भी मैंने अपने भाई को बुला लिया था.
वह मुझे बहुत शर्मीला लगता था जबकि मैं बड़ी शरारती थी.

अब तो मैं सिटी में रहने लगी थी तो मैं कुछ और ज्यादा ही मस्ती करने वाली लड़की हो गई थी.
जबकि मेरा भाई गांव में ही रहता था, इसलिए वह लड़कियों से ज्यादा बातें नहीं करता था … और मैं भी लड़की थी तो वह मुझसे भी बहुत शर्माता था.

मैं उसके साथ कभी शरारत करती, कभी उसको गुदगुदी कर देती तो कभी उसकी पप्पी ले लेती.
वह एकदम से शर्मा जाता और मुझे उसका यूं शर्माना बड़ा अच्छा लगता था.

एक दिन रात को मैंने खाना बनाया.
मैंने उस दिन उसे अपने घर पर ही सोने के लिए बुलाया था.

तो साथ में हम दोनों खाना आदि खाकर सोने के लिए आ गए.

मैंने जमीन पर बिस्तर बिछाया और उसे अपने बाजू में लेटने का कह दिया.
उधर ही मेरे दादाजी खाट पर सोते हैं.

मैं और भाई नीचे जमीन पर सोने लगे.
रात के करीब 11 बजे मैं मोबाइल देख रही थी

दादाजी और मेरे भाई सो रहे थे.
तभी अचानक से मेरे भाई ने करवट ली और उसका हाथ एकदम से मेरे बूब्स पर आ गया.

पहले तो मैं सिहर उठी क्योंकि पहली बार किसी मर्द ने मुझे मेरे मम्मों पर टच किया था.

मैंने उसकी तरफ देख कर चैक किया तो पाया कि सूरज सो रहा है.

कुछ ही देर में मेरी सिहरन मस्ती में बदल गई और अब मैंने भी उसके पैंट के ऊपर से उसके लंड पर हाथ रख दिया.
वह बेसुध सोया पड़ा था और मुझे उसके लंड का उभार मेरी वासना को जगाने लगा था तो मैंने उसके लौड़े को सहलाना शुरू कर दिया.

उसका लंड अभी भी उसकी तरह सो रहा था.

मैंने अपनी मेहनत से उसके लंड को सहला सहला कर जगा दिया.

उसका हाथ जो मेरे ऊपर था, उसे मैंने उठा कर अपनी पैंटी में डाल दिया और अपनी चूत पर रखवा दिया.

मैं करवट लेकर लेटी थी तो उसके होंठों पर हौले से किस करने लगी.

करीब पांच मिनट बाद वह हिला और उसने पोजीशन बदल ली.
उसके अलग होने के बाद मैंने अपनी चूत में खुद की उंगली डाली और चुत रगड़ कर काम चला लिया.
चुत से रस टपक गया तो मैं सो गई.

अगली सुबह मेरी नींद खुली तो मेरे पैर और हाथ दोनों उसके ऊपर थे और मुँह उसके मुँह के पास था.
यह कैसे हुआ, उस पर मैंने ध्यान न देते हुए सीधे उसे किस कर लिया.

उसकी आंखें खुल गईं.
मैं उसे देख कर हंस दी.

फिर मैंने उसके लंड को हिलाया तो उसने मुझे घूरते हुए देखा और कहा- ज्यादा पागलपन करने की जरूरत नहीं है!
बस इतना कह कर वह उठ कर ब्रश करने चला गया.

मैं भी नहा कर चाय नाश्ता आदि बनाने में लग गई.

दादाजी रेडी होकर बाहर घूमने चले गए.

सूरज जब नहाने गया तो वह अपनी टॉवल बाहर ही भूल गया.
उसके पास अब मुझे बुलाने के अलावा कोई चारा नहीं था तो उसने मुझे आवाज दी.

सूरज- दीदी मेरा टॉवल बाहर रह गया है, जरा दे दो प्लीज!
मैं उससे बोली- ज्यादा पागलपन करने की जरूरत नहीं है. बाहर आ जा और ले ले.

वह बोला- दीदी दे दे न यार, इतना भाव मत खा ना!
मैं- नहीं, आज तू खुद आकर ले ले.

वह पांच मिनट तक बाहर नहीं आया तो मैं ही चली गई और बोली- ले, ऐसे शर्मा रहा है जैसे पूरे गांव के सामने नंगा जाने को बोल रही हूँ तुझे!

वह टॉवल लपेट कर बाहर आया.
मैंने देखा कि उसका लंड तना हुआ था.

मैंने समझ लिया कि लौंडे की गर्मी बढ़ गई है.
मन ही मन मुस्कुरा कर मैं वापस किचन में जाकर अपना काम करने लगी.

उसे भी समझ आ गया था कि उसकी बहन की चुदास भड़की हुई है.

उस वक्त मैंने चुस्त टी-शर्ट और नाइट पैंट पहनी हुई थी, बालों को धोया हुआ था तो खुला रखा था.
मेरे बाल गीले थे और मेरे चेहरे पर लटें चिपक कर मुझे सेक्सी बना रही थीं.

तभी सूरज को न जाने क्या हुआ, वह किचन में ही मेरे पीछे से आया और मुझे अपनी बांहों में दबोच लिया.
वह मेरी गांड को दबाने लगा.

मैंने गुस्से से उसे पीछे धकेल दिया और बोली- ज्यादा पागलपन करने की जरूरत नहीं है, मुझे टच मत कर!

उसने दोबारा से आगे बढ़ कर मेरे बूब्स पर अपने हाथ रख दिए.
मैंने फिर से उसे धक्का मारा तो वह चला गया और हॉल में जाकर टीवी देखने लगा.

उसने खुद से मुझे छुआ था, तो मेरे मन में भी उससे चुदवाने की आग तो लग गई थी मगर मैंने कंट्रोल कर लिया और उसका फिर से करीब आने का इंतजार करने लगी.

इस बार काफी देर तक वह नहीं आया, तो मैं ही हॉल में आ गई और उसकी जांघों पर उसके मुँह के सामने मुँह करके बैठ गई.

मैं उससे चुदासी होकर बोली- साले, अगर तुझे चोदना ही था, तो सुबह इतना अकड़ क्यों रहा था?
वह बोला- पागल है क्या, दादाजी थे वहां पर … तुझे कुछ अकल है भी या नहीं?

उसके इतना बोलते ही मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसे बेतहाशा चूमने लगी.
मुझे जैसा जन्नत सा सुख मिलने लगा था.

वह भी मेरी पीठ पर हाथ फिराने लगा और मेरे बालों में हाथ डाल कर उन्हें सहलाने लगा.
बालों से खेलने के बाद वह मेरे दूध दबाने लगा.

मैंने उसकी शर्ट उतारी और उसके पैंट का हुक खोल दिया.
उसने भी मेरी टी-शर्ट उतार कर टीवी पर फेंक दी.

अन्दर मैंने ब्लैक कलर की ब्रा पहनी थी जिसमें मेरे गोरे दूध मस्त दिख रहे थे.

अब उसने मुझे खड़ी किया और मेरी नाइट पैंट भी उतार दी.
मैं अपने भाई के सामने ब्रा और पैंटी में आ गई थी.

उसने मुझे नीचे बैठने को कहा और वह खड़ा हो गया.
उसने मुझे इशारा किया कि पैंट उतार.
मैंने झट से उसकी पैंट उतार दी.

उसने मेरा सर पकड़ा और एक झटके में अपना लंड मेरे मुँह में पेल कर मेरे गले तक ठूंस दिया.
मुझे उसका यह रवैया अच्छा नहीं लग रहा था पर उसकी खुशी के लिए मैं इस काम को करना स्वीकार कर लिया था.

उसका लटका हुआ लंड केवल छह इंच का था.
मगर इस वक्त वह तन कर 7 इंच का हो गया था.

मुझसे उसका लंड झेला नहीं जा रहा था … मगर कुछ ही समय बाद मैं अपनी सामर्थ्य के अनुसार उसके तीन चौथाई लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी थी.

उसने मेरे हाथ को पकड़ कर अपने अंडकोष सहलाने के लिए रख दिया. मैं उसके पोते सहलाती हुई लंड चूसने लगी.

अब मैं सोच रही थी कि मैं कितनी गलत थी … मैं समझ रही थी कि साला शर्मीला है लेकिन बहन के लंड को सब आता है.
लंड भी मस्ती से चुसवा रहा था और पोते भी सहलवा रहा था.

कुछ ही देर बाद उसने मेरे मुँह में ही अपने लौड़े का दही गिरा दिया.
उसने लंड को मुँह में ठांस कर रखा था तो मैंने लौड़े से निकले पानी को पी लिया.

अब उसने मुझे सोफे पर बिठाया और मेरी ब्रा का हुक खोल कर ब्रा को हवा में लहराते हुए दूर को उछाल दिया.

ब्रा हटने से मेरे बूब्स बाहर खुली हवा में फुदकने लगे.

अब उसने मेरी पैंटी की इलास्टिक में अपनी उंगलियां फंसाईं और मेरी टांगों से खींचा तो मैंने भी टांगें हवा में उठा दीं और उसने पैंटी उतार दी.

पैंटी जैसे ही उतरी, उसने मेरी टांगों को फैला दिया और मेरी चूत पर अपना मुँह रख दिया.

वह मेरी चुत को चाटने लगा और जीभ को अन्दर भी डालने लगा.
मैंने मदभरी सिसकारियां भरना शुरू कर दिया- आह आह … साला क्या मस्त चूस रहा है. आह चूस कुत्ते उम्म … रगड़ दे मेरी चुत को आह!

मैं उस वक्त अपने भाई की सामने पूरी नंगी किसी रंडी की तरह पड़ी थी.
आज से पहले मुझे कभी किसी लड़के ऐसा नहीं किया था तो मेरी चूत को भी पहली बार ही किसी ने छुआ था.

मेरा ये सब पहली बार था.
मैं अपने ही चचेरे भाई से चुद रही थी.

वह चुत चूसते हुए मेरे बूब्स को भी दबाने लगा.

मेरी चूत ने जब पानी छोड़ा, तो आधा पानी उसने पी लिया और आधा अपने मुँह में भर कर मुझे किस करने लगा.
उसने मुझे चूमते हुए मेरी ही चुत का पानी मुझे पिला दिया.

यह सब होने के बाद मैं उससे बोली- भाई, अब मुझसे रहा नहीं जाता. इस दिन के लिए मैंने कितना इंतजार किया है … आज मेरा काम उठा दे.
वह मुझे देख कर बोला- मतलब तू अभी तक किसी से चुदी नहीं है … सील पैक है मेरी बहन?
मैं- हां भाई अब जल्दी से चोद दो मुझे!

उसने अपने लंड को मेरी चूत पर सैट किया और धक्का मारने लगा.
मेरी चूत टाइट होने के कारण उसका मोटा लंड अन्दर नहीं जा रहा था.

उसने तेल ला कर लंड को चिकना किया और मेरी चूत में भी तेल लगा कर उंगली से छेद को ढीला किया.
फिर उसने लौड़े को चुत में लगाया और धक्का मारने लगा.

इस बार उसका लंड थोड़ा सा अन्दर घुस गया.
मेरी मुँह से तेज आवाज निकल गई- आह्ह आह्ह्ह!

उसने मेरे मुँह पर हाथ रख कर कहा- अरे मरवाएगी क्या … पहले बार ले रही है तो थोड़ा दर्द तो होगा ही ना … सहन कर!

उसने मेरे मुँह पर अपना मुँह रखा और मुझे किस करने लगा.
मैं भी उसके किस से कुछ मस्त सी हो गई.

और तभी उसने जोर से धक्का दे कर अपना लगभग पूरा लंड मेरी चूत में पेल दिया.
मेरी घुटी हुई आवाज उसके मुँह में ही दब गई.

मैं छटपटाने लगी और रोने लगी.
मैंने उसको खुद से दूर करने की कोशिश भी की, मगर उसने मुझे दबाए रखा और मेरी चूत में लंड को चलाने लगा.

मेरी चुत आग उगलने होने लगी, उसमें से शायद खू.न भी निकल आया था.
यूं समझो कि मेरी तो बस जान ही निकलने वाली थी.

थोड़ी देर बाद मैं चुप हुई तो उसने धक्के मारने चालू किए.
मुझे दर्द भी हो रहा था और मजा भी आ रहा था.

कुछ पल बाद मैंने चूत की तरफ देखा तो उसका लंड खू.न से लथपथ था और कुछ खू.न नीचे भी गिर रहा था.
वह मुझे पूरी ताकत से जोर जोर से चोदने लगा.

मैं भी बोल रही थी ‘आह आह उफ्फ चोद मुझे भाई … आह अपनी चुदासी बहन को चोद दे साले .. आह!’
उसने भी अंधाधुंध आधा घंटा तक मेरी चूत चोदी उसके बाद उसने मुझे घोड़ी बना लिया.

मुझे लगा कि ये कुतिया बना कर चुत चोदेगा, लेकिन उसी वक्त उसने मेरी गांड के छेद को अपनी उंगली से कुरेदा.
मैं समझ गई कि अब तो ये बहन का लौड़ा मेरी जान ही निकाल देगा.

उसने मुझे कुतिया बना कर मेरी गांड के छेद में अपनी उंगली से तेल लगाया और लंड घुसेड़ने की कोशिश की.
मैं भी न जाने किस मूड में थी तो मैंने गांड के छेद को ढीला छोड़ दिया.

उसका लंड अभी थोड़ा सा ही मेरी गांड में गया था कि मैं दर्द से चिल्ला उठी- आह माँ … मर गई.

उसने मेरे चूतड़ पर चमाट मारी और गुर्रा कर बोला- चुप कर बहन की लौड़ी … क्यों चिल्ला रही है साली कुतिया!
यह कह कर उसने मेरे बाल पकड़े और जोर से लंड को गांड में पेल दिया.
मुझे एकदम से ऐसे लगा मानो गर्म सरिया मेरी गांड में घुसेड़ दिया गया हो.

वह मुझे बकरी के जैसे दबोचे हुए था और अपनी कमर को आगे पीछे करता हुआ मेरी गांड चोदने लगा.

करीब पांच मिनट बाद मुझे उसका लंड अपनी गांड में चलता हुआ बहुत अच्छा लगने लगा था.

उस वक्त वह मेरी पीठ पर पूरा लेट सा गया था और अपने दोनों हाथों से मेरे बूब्स दबाने लगा.
मैं आह आह करने लगी और वह जोर जोर से मेरी गांड मारने लगा.

वह मेरी चुत को भी टटोल रहा था तो मैं भी गर्म होकर झड़ गई थी.

कुछ धक्के मारने के बाद वह बोला- पानी कहां निकालूं?
मैं बोली- अन्दर ही गिरा दे कुत्ते!

वह हंस दिया और उसने अपने लंड की पिचकारियां मेरी गांड में छोड़नी शुरू कर दीं.
झड़ कर वह निढाल हो गया और मेरे ऊपर ही गिर गया.

हम दोनों को अभी कुछ ही देर हुई थी कि उतने में ही डोर-बेल बजी.

मैं जल्दी से हटी और हम दोनों ने जल्दी जल्दी अपने कपड़े पहन लिए.

मैं किचन में काम करने लगी और उसने जाकर दरवाजा खोला.
दादाजी वापस आ गए थे.

मैं ठीक से चल भी नहीं पा रही थी.
उसने मुझे बैठने के लायक भी नहीं छोड़ा था.

इस तरह से मेरे भाई ने मेरी चूत और गान्ड चोदी.

दादाजी मुझे लंगड़ाती देख कर बोले- क्या हुआ? ऐसे क्यों चल रही है?
मैं- कुछ नहीं, वह पैर में जरा मोच आ गयी है.

दादाजी- संभाल कर काम किया कर बेटा!
मैंने दादाजी को हामी भरी.

अब तक मेरा भाई घर से निकल कर अपने दोस्तों के साथ चला गया था.

सारा दिन ऐसे ही निकल गया. मैं एक पेन किलर खाकर सो गई थी.
देर शाम को हम सबने खाना खाया.

मुझे पता था कि आज रात को सूरज मुझे जरूर चोदेगा इसलिए मैंने ब्रा पैंटी पहनी ही नहीं थी.

रात को मैंने बिस्तर बिछाया.
मैं और दादाजी सो गए.

दादाजी ने दवा खाई हुई थी तो वे गहरी नींद में सो गए थे.

सूरज देर से आया.
वह जैसे ही आया, मेरे पीछे से चिपक कर मेरे बूब्स दबाने लगा.

उसने मेरी नाइटी उतार दी.
मेरी आंख तो दूध दबने से ही खुल गई थी, लेकिन मैंने सोने का नाटक किया.

उसने अपने लंड पर थूक लगाया और मेरी चूत पर भी लगा दिया.
हाथ से लौड़े को पकड़ कर चूत की फांक कर लंड घिस कर सैट किया और एक झटका लगा दिया.
पर लंड फिसल गया.

मुझसे रहा नहीं गया

मैं धीमे से बोली- सूरज, मेरी चूत में बहुत आग हो रही है, जरा जल्दी से पेलो और धीरे धीरे से चोदना.
उसने मेरी गांड दबाते हुए हामी भरी.

मैं करवट लेकर उसके सामने आ गई और उसे चूमने लगी.
उसने वापस लंड सैट करके मेरी एक टांग को अपनी कमर पर रख लिया और एक जोर से झटका दे दिया.

मेरे मुँह से आह की आवाज निकल गई. उसने होंठों से होंठ दबा लिए.
मैंने उसके होंठों को काट लिया.

अब मुझे अच्छा लगने लगा था.
मैंने उससे कहा- अब और जोर जोर से करो!

वह मुझे चित करके मेरे ऊपर चढ़ गया.
उसने मेरे दोनों पैरों को अपने दोनों कंधों पर ले लिया और जोर जोर से धक्के मारने लगा.

उसने मुझे इस पोजीशन में लगभग 20 मिनट तक हचक कर चोदा.
मैं दो बार झड़ चुकी थी लेकिन वह रुक ही नहीं रहा था.
शायद आज उसने कोई दवाई खाई हुई थी.

फिर वह झड़ने वाला था तो मेरे कान में बोला- पानी कहां निकालूं?
मैं बोली- भोसड़ी के मुझे अपने बच्चे की मां बना दे!

उसने हॉट सिस्टर सेक्स करके सच में मेरी चूत में ही पानी छोड़ दिया.

मैंने उसे गाली दी तो वह हंस दिया और उसने मुझे दवा की स्ट्रिप पकड़ा दी और बोला- ले दवा खा लेना.

उस दिन से हम दोनों रोज अलग अलग पोजीशन में सेक्स का मजा लेने लगे.

कभी वह मुझे सीढ़ियों पर चोद देता, तो कभी टीवी टेबल पर, तो कभी गोदी में उठा कर चोदता रहता.
मैं अपने भाई से चुदवा कर बेहद खुश हूँ.

आपको मेरी यह हॉट सिस्टर सेक्स कहानी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.
dhananjaybpatil353@gmail.com

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