बस Xxx स्टोरी में अयोध्या से दिल्ली की बस में मेरे साथ 2 भाभियाँ बैठ गयी. मैं मजा लेने के लिए एक के कंधे पर सर टिका कर लेट गया. उसने मेरा हाथ अपनी जांघ पर रख लिया.
हाय दोस्तो, मेरा नाम राहुल राज है और मैं ग्रेटर नोएडा का रहने वाला हूं.
मेरे लंड का साइज 7 इंच है.
मैं आज आपको अपनी दिलचस्प बस Xxx स्टोरी बताने जा रहा हूँ जो मेरे साथ हाल ही में घटी थी.
दरअसल मुझको एक बार बस से यात्रा करते समय दो भाभियां मिली थीं.
उस दौरान उन दोनों ने कैसे मेरे लंड को चूसा और मैंने उनकी चूत का पानी निकाला, यह सब मैं आपको विस्तार से लिख कर बता रहा हूँ.
हुआ ऐसा कि मैं जनवरी माह में अयोध्या गया था.
इस तरफ से तो मेरी टिकट पक्की हो गई थी मगर उधर से मेरी टिकट नहीं हो पाई थी क्योंकि भीड़ बहुत ज्यादा थी.
इस कारण से मैंने वापसी में बस से आने का सोचा और मैंने बस की टिकट बुक कराई.
मुझको पता था कि बस में भी भीड़ बहुत ज्यादा मिलेगी इसलिए मैंने विंडो सीट बुक कराई.
यह सीट भी मुझको एक दिन के बाद मिली.
दोस्तो, मुझको स्मोकिंग करने की आदत है तो मैंने सबसे पीछे वाली सीट बुक करवाई थी ताकि मुझको कोई प्राब्लम न हो.
मेरी बस वहां से 9 बजे चलने वाली थी और मुझको सुबह 4 बजे दिल्ली उतार देती.
मैं टाइम पर अपनी बस की सीट पर पहुंच गया और विंडो पकड़ कर आराम से बैठ गया.
थोड़ी ही देर में उस बस में दो माल किस्म की भाभियां चढ़ीं.
उनको देख कर में बस यही सोच रहा था कि बस इन दोनों की एक साथ मिल जाए तो दोनों को जम कर चोद दूंगा.
मैं अपनी आंखें बंद करके ये सोच ही रहा था कि इन दोनों को किस प्रकार से चोद सकता हूँ. यदि वे मुझे मिलतीं तो मैंने अपने दिमाग में दोनों की पोजीशन भी सैट कर ली थी, अभी यही सब मैं सोच रहा था.
तभी अचानक मुझको लगा कि कोई मेरे पास आकर बैठा है.
मैंने जैसे ही आंखें खोलीं, तो वे दोनों मेरे ही पास बैठी थीं.
मैं बहुत खुश हुआ कि चलो सफर में मजा आ जाएगा और इन दोनों के सहारे रास्ता भी आराम से कट जाएगा.
खैर … थोड़ी ही देर में हमारी बस चल दी और जैसे ही बस ने रफ्तार तेज की तो हवा भी तेजी से अन्दर आने लगी.
हवा में ठंडक थी तो मुझको ठंड लगने लगी क्योंकि मैं विंडो पर ही बैठा था.
मैंने अपने बैग से शॉल निकली और ओढ़ ली … लेकिन ठंड बहुत थी.
जनवरी का महीना था तो शाम के वक्त सर्दी बढ़ने लगी थी.
मैंने विंडो को बंद कर दिया और आराम से अपने फोन को चलाने लगा.
उस वक्त भी मेरे दिमाग में वे दोनों हसीन भाभियां ही चल रही थीं.
वे दोनों बहुत ही सेक्सी माल थीं, दोनों की उम्र लगभग 35 से 40 के बीच की होगी.
दोनों ने ही सेम कलर के कपड़े पहने हुए थे.
उन्होंने ब्लैक सूट पहने हुए थे और दोनों के सूट एकदम चुस्त थे, जिसमें से उनके उभरे हुए चूचे साफ नजर आ रहे थे.
दोनों महिलाएं एकदम बॉम्ब लग रही थीं, उनके नशीले फिगर भी कमाल के थे.
उनके दूध लगभग 36 के रहे होंगे और गांड भी 38 की होगी.
थोड़ी देर बाद उनमें से एक बोली- सुनिए मुझको बस में थोड़ी प्रॉब्लम होती है तो क्या तुम अपनी सीट मुझको दे दोगे.
मैंने उनको अपनी सीट दे दी.
अब मैं उन दोनों के बीच में फंसा हुआ था और उन दोनों की मोटी मोटी जांघें मेरी जांघों से रगड़ रही थीं.
मैं बस उनके नर्म जिस्म को सोच सोच कर ही मजे ले रहा था.
बीच बीच में मैं अपना पैर खुजाने के बहाने से उनकी जांघों को भी छू लेता था.
उन दोनों को देख कर मेरे मन में वासना जागने लगी और मेरा लंड उफान मारने लगा.
लेकिन मैं अभी कुछ भी नहीं कर सकता था क्योंकि बस पूरी भरी हुई थी.
मैं कुछ दूसरे तरह से मजे लेना चाह रहा था इसलिए मैंने सोने का नाटक करते हुए अपनी राइट वाली आंटी के कंधे पर सर रख दिया.
उसने कोई रिएक्ट नहीं किया.
उसको लगा कि मैं सच में नींद में हूँ.
मैं उसके कंधे पर सर टिका कर सो गया था और उसके बालों की महक लेने लगा था.
मुझको उसके मादक शरीर की भी महक आ रही थी जो मुझको पागल कर रही थी.
मैंने थोड़ा कसमसाते हुए दूसरी ओर सर कर दिया लेकिन उसने भी कोई रिएक्ट नहीं किया.
उसके बालों में से भी बिल्कुल सेम खुशबू आ रही थी लेकिन उसके शरीर की खुशबू कुछ अलग थी.
मैं ऐसे ही बदल बदल कर मजे लेने लगा.
करीब 12 बजे बस एक ढाबे पर रुकी, मैं उस समय नींद में चला गया था.
तो उसमें से एक ने मुझको उठाया- उठो हीरो, बस रुक गई है कुछ खा लो … उसके बाद फिर से सो जाना!
मैं कसमसाता हुआ उठा और पूछा कि दिल्ली पहुंच गए क्या?
तो उन दोनों ने हंस कर कहा- अभी नहीं, अभी तो बस रुकी है. कुछ खाना हो तो खा लो, फिर नहीं रुकेगी.
अब हम लोग नीचे उतर गए.
मैं थोड़ा नॉर्मल हुआ और उनसे पूछा- आप कहां से हैं?
उन्होंने बताया कि हम लोग दिल्ली से हैं.
बातों से मालूम हुआ कि एक का नाम पूजा और दूसरी का नाम रानी था.
वे दोनों अच्छी सहेलियां थीं और अयोध्या घूमने आई थीं.
फिर उन दोनों ने मेरे बारे में पूछा तो मैंने भी अपने बारे में बता दिया और अपना नाम भी बताया.
फिर हम तीनों खाना खाने के लिए बैठ गए और ऐसे ही बातें करते रहे.
थोड़ी ही देर में हमारी बस चल दी और हम तीनों बस में आकर बैठ गए.
बस चल दी.
मैं अपनी चादर ओढ़ कर दुबारा सोने का नाटक करने लगा ताकि और मजे लिए जा सकें.
वे दोनों अपना अपना फोन चला रही थीं.
विंडो के पास बैठी पूजा अपने फोन को कुछ ज्यादा ही गौर से देख रही थी.
मैंने अपनी थोड़ी सी आंख खोल कर देखा तो वह अन्तर्वासना पर स्टोरी पढ़ रही थी.
कोई चुदाई की कहानी पढ़ने से उसका चेहरा लाल पड़ा हुआ था.
मैंने भी नींद का नाटक करते हुए उसकी जांघ पर हाथ रख दिया.
पर पूजा ने कोई रिएक्ट नहीं किया.
मैंने अपना हाथ ऐसे ही रखा हुआ था.
थोड़ी देर बाद पूजा ने भी अपना हाथ मेरे हाथ के ऊपर रख दिया और मेरे हाथ को पकड़ कर अपनी जांघ सहलवाने लगी.
शायद वह मुझको चेक कर रही थी कि मैं सोया हुआ हूँ या नहीं.
मैंने भी कोई रिएक्ट नहीं किया.
फिर पूजा ने अपने आप को थोड़ा एडजेस्ट किया और नीचे की तरफ सरक कर बैठ गई.
उसने थोड़ी देर बाद ही मेरे हाथ को अपनी पजामी के अन्दर डाल कर अपनी पैंटी के ऊपर से चूत पर रख दिया और अपना हाथ बाहर निकाल लिया.
मेरा हाथ उसकी चूत पर ही रखा था. उसकी पैंटी हल्की गीली हो गई थी.
वह सेक्स कहानी पढ़ने में लग गई.
फिर उसने मेरे हाथ को पकड़ कर पैंटी में घुसेड़ दिया.
मैं गनगना उठा और उसकी चुत को फ़ील करने लगा.
अब वह कभी कभी अपने हाथ से मेरे हाथ को अपनी चूत पर दबा देती थी तो मुझे चुत के ऊपर उगे छोटे छोटे बाल समझ आने लगते थे.
कुछ ही देर में मेरे हाथ में उसकी झांटें चुभने लगी थीं.
लेकिन मैं भी नींद का नाटक करते हुए गीली होती चुत के मजे लेने लगा.
मैं भी पूरा मादरचोद हूँ तो अपने हाथ को हिला नहीं रहा था, बस मैंने ऐसे ही चूत पर हाथ रखा हुआ था.
मुझको डर था अगर मैंने अपना हाथ हिलाया तो पूजा को पता लग जाएगा कि मैं जागा हुआ हूँ.
पूजा कहानी पढ़ने में लगी थी और मेरा हाथ उसकी चूत पर रखा हुआ था.
फिर उसने अपना हाथ भी अपनी पैंटी में डाला और मेरे हाथ के ऊपर रख कर अपनी चूत को मसलवाने लगी.
मैं अब भी चुपचाप सोने का नाटक कर रहा था.
उसने अपने हाथ से मेरे उंगली को पकड़ा और अपने पैर फैला कर अपनी चूत में मेरी एक उंगली डाल कर आगे पीछे करने लगी.
दो तीन मिनट के बाद मैंने सोचा कि ये सही मौका है … नींद से उठने का.
वह अपने हाथ से मेरी उंगली को आगे पीछे करने में लगी हुई थी.
मैंने कसमसाते हुए आंख खोली और उसकी तरफ देखने लगा.
वह भी नशीली नजरों से मेरी तरफ देखने लगी और अपने होंठों पर अपनी उंगली रख कर मुझको चुप रहने का इशारा करके अपने काम में लगी रही.
वह अपने एक हाथ मेरी उंगली को चुत में आगे पीछे करने में लगी थी और अब तो वह मेरी तरफ मुस्कुरा कर भी देखने लगी थी.
फिर उसने धीरे से पूछा- मजा आ रहा है?
मैंने हां में सर हिला दिया.
वह बोली- और ज्यादा मजा लेना है?
मैंने पूछा- कैसे?
तो उसने अपना हाथ निकल कर मेरी पैंट में डाल दिया.
मेरा लंड पहले से ही खड़ा हुआ था.
उसने जैसे ही मेरे लंड को पकड़ा तो एकदम से अपनी आंखें बड़ी करके बोली- ओह कितना बड़ा है तुम्हारा?
वह मेरे लंड को मेरी पैंट में ही सहलाने लगी, जिससे मुझको भी मजा आने लगा.
इधर मैंने अपनी उंगली चुत में चलानी रोक दी थी तो वह बोली- तुम भी आगे पीछे करो!
मैंने अपनी उंगली को आगे पीछे करना शुरू कर दिया.
थोड़ी देर बाद उसने चूत में उंगली करने से मना कर दिया.
मैंने पूछा- क्या हुआ?
वह बोली- कुछ नहीं.
उसने मेरा हाथ अपनी पैंटी से निकाल दिया जो कि उसकी चूत के पानी से पूरा भीगा हुआ था.
मैंने जैसे ही अपने हाथ को पौंछने के लिए चादर उठाई, उसने मना कर दिया.
वह बोली- इसको अपने लंड पर लगाओ.
मैंने उससे पूछा कि इससे क्या होगा?
वह बोली- पहले लगाओ तो, उसके बाद बताऊंगी.
मैंने अपनी पैंट से अपने लंड को बाहर निकाला और अपने हाथ पर लगा उसकी चूत का सारा पानी अपने लंड पर पौंछ दिया.
अब उसने मेरे लंड को पकड़ा और बोली- थोड़ी देर के लिए चुप रहना.
मैं हां में सर हिला दिया.
मेरा इशारा मिलते ही वह मेरी चादर में घुस गई और गप से मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया जिससे मेरी एकदम जान निकल गई और मेरे मुँह से सिसकारियां निकलने को हो गईं.
लेकिन मैंने अपने आप को कंट्रोल कर लिया.
बस में आजू बाजू और भी लोग थे, ज्यादा शोर होने से वे देखने लगते.
मगर हम दोनों के हिलने से बाजू में बैठी रानी को शक हो गया.
उसने अपनी सहेली पूजा की तरफ देखा, तो वह नीचे झुकी हुई थी और मेरा लंड चूस रही थी.
ये देख कर रानी मेरी तरफ देखने लगी.
मैंने उसे देखा तो वह बोली- क्या है ये सब?
मैंने कहा- कुछ नहीं, बस ऐसे ही!
इस पर रानी ने भी अपना हाथ चादर के अन्दर डाल दिया और चैक किया.
उसको पूरा अंदाजा लग गया कि चादर के अन्दर क्या चल रहा है.
उसने मेरे लंड को पूजा के मुँह से बाहर निकाला और उसका नाप लेने लगी.
कुछ पल लौड़े को मसलने के बाद उसने दुबारा से मेरे लंड को पूजा के मुँह में घुसा दिया और उसके सर पर हाथ रख कर मेरा लंड चुसाने में अपनी सहेली की हेल्प करने लगी.
रानी ने मुझसे पूछा- कितना बड़ा है?
मैंने बोला- सात इंच का.
यह सुनकर उसकी भी आंखें बड़ी हो गईं और वह बोली- अरे वाह … इससे तो आज हम दोनों को मजा आ जाएगा.
अब उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी पैंटी में डाल लिया और मेरी चादर से अपने आप को ढक लिया.
मैंने भी रानी की चूत में उंगली करना शुरू कर दिया.
वह भी मजे लेने लगी.
कुछ देर बाद उसने पूजा से पूछा कि तेरा हो गया हो तो अब मुझको चूस लेने दे!
पूजा थोड़ी ही देर में चादर से बाहर आ गई और रानी चादर के अन्दर घुस गई.
अब रानी मेरे लंड को चूसने लगी.
काफी देर चूसने के बाद मैंने अपने हाथ से रानी के सर को पकड़ा और अपने लंड पर दबा कर लौड़े का सारा पानी रानी के मुँह में भर दिया, जिसे रानी पूरा पी गई और उसने मेरे लंड को चाट चाट कर साफ कर दिया.
उसके बाद रानी भी चादर से बाहर आ गई.
रानी ने पूजा से कहा- पूजा, मजा आ गया!
इस पर पूजा बोली- हां तेरे को तो मजा आएगा ही कुतिया … सारी मेहनत मैंने की और सारा रस तू पी गई!
इस पर रानी हंस कर बोली- कोई बात नहीं यार, अगली बार मैं मेहनत कर दूंगी और तू रस पी लेना!
वे दोनों मुस्कुराने लगीं.
फिर हम तीनों ने चादर ओढ़ ली.
रानी और पूजा ने मेरे दोनों हाथों को अपनी अपनी चूत पर रख लिया और अपना एक एक हाथ मेरे लंड पर रख दिया.
हमारा पूरा सफर ऐसे ही बात करते करते कट गया.
करीब चार बजे बस ने हमको दिल्ली पहुंचा दिया.
हम तीनों उतरने लगे तो रानी बोली- अभी जाना मत, तुमसे कुछ बात करनी है.
हम तीनों नीचे उतर आए.
रानी ने पूजा से कहा- पूजा, तुम जाकर बैग ले आओ.
पूजा बैग लेने चली गई और रानी ने मेरे से पूछा- अब कहां जाओगे तुम?
मैंने कहा- अभी तो कहीं नहीं जाऊंगा, यहीं बस अड्डे पर ही रहूंगा. छह बजे कोई बस चलेगी, तो जाऊंगा मुझे ग्रेटर नोएडा के लिए बस लेनी है.
उसने कहा- अगर तुमको कोई काम नहीं है तो हमारे साथ चलो, शाम को निकल जाना. वैसे भी तुम यहां पर कब तक वेट करोगे. ठंड भी बहुत ज्यादा है.
इस पर मैं भी राजी हो गया और सोचा शायद रूम पर जाकर इन दोनों की चूत चोदने को मिल जाए.
यही सब सोच कर मैंने हां कर दी.
इतने में पूजा बैग लेकर आ गई.
रानी ने पूजा से कहा- ये भी हमारे साथ चलेगा … और शाम तक हमारे साथ ही रहेगा.
इस पर पूजा भी खुश हो गई और बोली- ये तो अच्छी बात है.
फिर रानी ने टैक्सी बुक की और थोड़ी ही देर में हम सब उनके फ्लैट पर पहुंच गए.
उनका एक रूम वाला ये फ्लैट काफी अच्छा था.
कमरे में केवल एक ही डबल बेड पड़ा हुआ था, उससे जाहिर हो रहा था कि वे दोनों एक साथ ही लेटती हैं.
उन दोनों ने अपने अपने बैग रखे और वहीं पर दोनों अपने कपड़े उतारने लगीं.
पहले उन्होंने अपनी पजामी उतारी, तो उनकी दूध जैसी जांघें मस्त दिख रही थीं.
दूधिया और संगमरमरी जांघों को देख कर मेरा लंड जोर मारने लगा.
कुछ ही पलों में उन दोनों ने अपने कपड़े उतार दिए और सिर्फ ब्रा पैंटी में रह गईं.
क्या मतवाली भाभियां लग रही थीं दोनों, साली केवल ब्रा पैंटी में मेरे सामने खड़ी थीं.
दोनों ने पिंक कलर की ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी.
उनकी ब्रा से उनके दूध बाहर आने के लिए तड़फ रहे थे और उनकी गांड एकदम उठी हुई थी.
जितनी ज्यादा वे दोनों कपड़ों में सेक्सी लग रही थीं, उससे कहीं ज्यादा वे लोग ब्रा पैंटी में हॉट लग रही थीं.
मेरा तो मन कर रहा था कि दोनों को यहीं पटक कर चोद दूँ.
फिर पूजा मेरी तरफ देख कर बोली- क्या देख रहे हो, तुम भी अपने कपड़े उतार लो.
मैंने बिना देर किए अपने सारे कपड़े उतार दिए, मैं सिर्फ अपने कच्छे में था.
उसमें से मेरा खड़ा लंड साफ नजर आ रहा था.
लौड़े ने मेरे कच्छे को तंबू बनाया हुआ था.
ये देख कर पूजा बोली- देख रानी, इसका तो अभी से खड़ा हो गया.
रानी ने मेरे लंड की तरफ देखा और मुस्कुरा कर बोली- इसको शांत कर लो … इसका अभी कोई काम नहीं है. इसका काम हमको दिन में पड़ेगा.
मैंने कहा- अब तो इसको तुम दोनों ही शांत कर सकती हो.
इतना सुनते ही पूजा बोली- मैं तो वाशरूम जा रही हूँ रानी, तू इसको शांत कर दे … और ध्यान रखना कि इसका रस मत पी जाना. वह मैं आ कर पिऊंगी.
रानी ने पूजा से कहा- ठीक है मेरी जान तू जा, तब तक मैं इसके लौड़े को तेरे लिए तैयार करती हूँ.
रानी ने अपनी ब्रा उतार दी और मेरे पास आ कर मेरा कच्छा उतार दिया.
उसने मेरे लंड पर थूक लगाया और अपनी चूचियों के बीच में लेकर आगे पीछे करने लगी.
बीच बीच में वह जीभ से लौड़े को चाट कर उस पर अपना थूक भी लगा देती थी … ताकि मेरा लंड चिकना बना रही और चूचियों को लंड का मजा मिल सके.
फिर रानी ने मेरे लंड को मुँह में भर लिया और चूसने लगी.
मैं तो मानो जन्नत में पहुंच गया था.
मेरे मुँह से कामुक सिसकारियां निकल रही थीं और रानी गप गप करके मेरे लंड को चूसे जा रही थी.
थोड़ी देर बाद पूजा भी वाशरूम से बाहर आ गई.
रानी ने पूजा का हाथ पकड़ कर अपने पास बैठा लिया और अपने मुँह से मेरा लंड निकाल कर पूजा के मुँह में घुसा दिया.
रानी बोली- ले मेरी जान, तेरे लिए ही तैयार किया है इसको, चूस ले और पी जा इस गन्ने का सारा रस.
अब पूजा मेरा लंड चूसने लगी और रानी उठ कर बेड पर लेट गई.
पूजा ने मेरा लंड चूस चूस कर सारा पानी निकाल दिया और मेरे सारे पानी को गटक गई.
उसने मेरा लंड चाट चाट कर साफ भी कर दिया.
रानी बोली- क्यों पूजा अब आया मजा?
इस पर पूजा बोली- हां यार, अब सही से मजा आया है … इसके लंड का पानी पी कर बड़ी तृप्ति हुई है, बहुत दिनों से लंड का पानी पिया ही नहीं था. बस में तो सारा पानी तूने पी लिया था तो अब जाकर मेरे कंठ की प्यास बुझी.
यह कह कर पूजा भी बेड पर जा कर लेट गई और उसने मुझको भी बेड पर आने का इशारा किया.
रानी भी जाकर लेट गई थी तो उन दोनों ने मुझको अपने बीच में लिटा लिया.
उनके बीच में लेट कर मुझको बहुत अच्छा लग रहा था.
कभी मैं पूजा की पैंटी में हाथ डाल देता तो कभी रानी की चुत को उंगली से चोदने लगता.
ऐसा करते करते पता नहीं, कब मेरी आंख लग गई और मुझे बड़ी ही अच्छी नींद आई.
दोस्तो, पूजा और रानी के साथ मेरी थ्री-सम सेक्स कहानी का अगला भाग आपको चुदाई का भरपूर मजा देगा.
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