सेक्सी भाभी स्टोरी में लोकल बस में भीड़ में मुझे एक भाभी के जिस्म से सट कर खडा होना पड़ा. उन्होंने मेरा लंड पकड़ लिया और अपने घर ले गयी.
सभी मस्त मस्त भाभी और भाइयों को मेरी तरफ से नमस्कार!
दोस्तो, मेरा नाम जय अग्रवाल है। मेरी उम्र 26 साल है। मैं दिखने में एकदम साधारण लड़का हूँ। मेरे लंड का साइज़ 5.5 इंच है, मोटाई 3 इंच है।
यह मेरी पहली कहानी है। सेक्सी भाभी स्टोरी में कोई गलती हो तो माफ़ करें।
लड़के अपने लंड को अपने हाथ में ले लें और भाभी और लड़कियाँ अपनी चूत में उँगली डाल लें!
सेक्सी भाभी स्टोरी की नायिका है सायना भाभी (नाम काल्पनिक है, पहचान गुप्त रखने के लिए)।
उनकी उम्र 28 साल है। भाभी की साइज़ 36-32-38 है।
आप समझ ही सकते हो, भाभी देखने में एकदम लाजवाब फिगर वाली महिला हैं।
भाभी का अभी तक कोई बच्चा नहीं है।
उन का पति एक इंटरनेशनल कंपनी में काम करता है, इसलिए वो ज़्यादातर घर से बाहर रहता है।
दोस्तों, ये कहानी आज से तीन महीने पहले की है।
मैं अपने शहर से वडोदरा नौकरी रोज बस से जाता हूँ।
रोज की तरह बस में बहुत अधिक भीड़ थी।
भाभी मेरे पीछे ही बस में चढ़ीं।
बस में चढ़ने के बाद हमें सीट नहीं मिली, इसलिए हम दोनों ही खड़े हुए थे।
मैंने आगे की तरफ मुँह किया तो मुझे भाभी दिखीं।
मुझे पहली ही नज़र में भाभी दिल में उतर गयीं और भाभी के सेंट की खुशबू ने मुझे भाभी का दीवाना बना दिया।
बस चली तो थोड़े से धक्के ने मुझे बिल्कुल भाभी से मिला दिया और मेरा सीना भाभी की कमर से टच हो गया।
अब मुझे भी मज़ा आने लगा।
मैं अब हर धक्के के साथ बिल्कुल भाभी के करीब आने लगा।
भाभी की मनमोहक फिगर को देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया, जो अब बार-बार भाभी की गांड में टच होने लगा।
उनको शायद ये चीज़ महसूस हो गयी।
भाभी ने पलटकर गुस्से में मुझे देखा तो मैंने अपना चेहरा नीचे की तरफ कर लिया।
मैं पीछे नहीं जा सकता था क्योंकि बस में बिल्कुल भी जगह नहीं थी।
अबकी बार ब्रेकर आया तो बस में तेज़ धक्का लगा, जिससे मैं बिल्कुल भाभी के ऊपर आ गया और मेरा लंड भाभी की दरार में घुस गया।
अब भाभी मेरे तरफ गुस्से में देखने लगीं।
मैं बोला- भाभी जी, ये धक्के की वजह से हुआ है और मेरी कोई गलती नहीं है!
भाभी मेरी तरफ देखकर थोड़ा सा मुस्कुरा दीं।
मुझे भी ग्रीन सिग्नल मिला।
अब मैं बिल्कुल भाभी से चिपककर खड़ा रहा।
मेरा लंड भाभी की दरार में था।
भाभी की बिल्कुल मखमल जैसी गांड के अलग ही मज़े थे।
अब भाभी पीछे मुड़कर मेरी तरफ देखने लगी तो अबकी बार मैंने चेहरा नीचे नहीं किया और भाभी की आँखों में देखता ही रहा।
भाभी ने आगे की तरफ घूमने से पहले एक प्यारी सी स्माइल पास कर दी।
अब मुझे कोई भी डर नहीं था।
अब मैं भाभी की गांड के ऊपर लंड को चिपकाये रखा।
शायद ये चीज़ भाभी को भी गर्म कर रही थी।
थोड़ी देर बाद भाभी ने अचानक हाथ पीछे करके लंड को पकड़ लिया।
मुझे बिल्कुल भी इस चीज़ की कोई उम्मीद नहीं थी।
बस में भीड़ होने के कारण किसी ने देखा नहीं।
मैंने भाभी के हाथ को एक ही झटके में अलग किया तो भाभी मेरे को पीछे मुड़कर गुस्से में देखा।
अब मैंने भाभी को इशारे में समझाया कि बस स्टॉप पर उतरकर बात करते हैं, यहाँ किसी ने देख लिया तो दिक्कत खड़ी हो जाएगी।
फिर मैं पूरे रास्ते भाभी की गांड में लंड लगाकर खड़ा रहा, जिससे भाभी पूरे रास्ते में गरम हो गयीं।
जैसे ही बस स्टॉप आया, भाभी उतर गयीं।
मैं भी भाभी के पीछे-पीछे उतर गया और भाभी से बात हुई तो भाभी बोलीं- अभी मेरे घर चलो! कोई भी मेरे घर नहीं है!
मैं बोला- मुझे भी ड्यूटी पर जाना है। आप नंबर दे दो, मैं ऑफिस के बाद या फ्री होकर कॉल करता हूँ।
भाभी बोलीं- आग अभी लगाई है, शांत बाद में करोगे!
मैं बोला- आपकी बात सही है, लेकिन मेरे को ड्यूटी पर भी तो जाना होगा।
भाभी बोलीं- मेरे साथ चलो! एक दिन की पगार मैं दे दूँगी, लेकिन अभी मेरे साथ चलके जो तुमने आग लगाई है उससे शांत करो या फिर मुझे भूल जाओ। मैं तुम्हें कोई नंबर नहीं दूँगी!
अब मैं समझ गया कि भाभी बहुत प्यासी हैं तो फिर मैंने अपने सीनियर को कॉल करके बोला- मैं आज नहीं आ सकता। मेरी तबीयत बहुत खराब है।
बॉस ने भी मुझे आराम करने को बोल दिया।
भाभी से पूछा- घर पर कौन-कौन है अभी?
तब भाभी ने बताया- मेरे पति ज़्यादातर बाहर ही रहते हैं, इसलिए मैं घर में अकेली ही हूँ।
इस चीज़ को सुनकर मुझे बहुत खुशी हुई और ये भी पता चला कि भाभी इतनी गर्म क्यों हैं।
फिर हमने ऑटो करके भाभी के घर के लिए निकल गये।
भाभी के घर पहुँचकर भाभी अंदर चली गयीं और मैं गेस्ट रूम में सोफा पर बैठ गया।
थोड़ी देर इंतज़ार करने के बाद भाभी आईं।
भाभी के आने के बाद मैंने सीधा अपनी बाँहों में भर लिया और भाभी होंठों से होंठों को मिला दिया।
भाभी के होंठ भी एकदम कमल की पंखुड़ी जैसे।
हम करीब 15 मिनट तक होंठों का ही रसपान करते रहे।
उसके बाद मैंने भाभी की साड़ी को उतारना शुरू किया।
भाभी की साड़ी उतरने के बाद भाभी एकदम कांटे माल दिख रही थीं।
मैंने उनका ब्लाउज़ उतारा।
भाभी ने काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी, जो भाभी के गोरे शरीर पर कयामत ढा रही थी।
मैंने अब देर करना ठीक नहीं समझा और अपने और भाभी के पूरे कपड़े उतार दिये।
भाभी ने मुझे सोफा पर बैठा लिया और मेरा लंड मुँह में ले लिया।
वे किसी बाज़ारू रंडी की तरह मेरे लंड को चूस रही थीं, जैसे मेरी रूह को मेरे लंड से निकाल लेंगी!
भाभी को अभी लंड चूसते हुए 5 मिनट ही हुए होंगे, मैंने भाभी के सिर को पकड़कर पूरा माल भाभी के मुँह में ही निकाल दिया।
अब मेरी बारी आई अपनी जीभ का जादू दिखाने की।
मैंने भाभी को सोफा के ऊपर लिटाया और भाभी के होंठों से चूमते हुए नीचे की तरफ बूब्स, पेट, नाभि जो भी गीला करते हुए भाभी की चूत पर मेरी जीभ पहुँची तो भाभी एकदम चौंक गयीं।
भाभी के मुँह से एकदम ‘आह आ आआआः आआ हह हहाअ’ की आवाज़ निकली।
भाभी मेरे सिर को बार-बार अपनी चूत में दबा रही थीं, जैसे मेरे पूरे सिर को चूत के अंदर कर लेंगी।
5 मिनट की जीभ के जादू के आगे भाभी नहीं टिक पाईं, भाभी ने सारा माल मेरे मुँह में ही निकाल दिया।
भाभी और मैं 10 मिनट ऐसे ही लेटे रहे।
फिर भाभी बोलीं- चलो बेडरूम में!
भाभी और मैं बेडरूम में गये और किस करने लगे।
भाभी अबकी बार तो ऐसे किस कर रही थीं जैसे मेरे होंठ को उखाड़ लेंगी!
अब हम दोनों बेड पर लेटकर 69 की पोज़ीशन में लगकर एक-दूसरे को चुदाई के लिए तैयार करने लगे।
मैंने भाभी की चूत में अपनी 2 उँगलियाँ भी डाल दीं।
अबकी बार भाभी एकदम पागलों की तरह आवाज़ करने लगीं।
वे अब मुझे गाली देने लगीं- मादरचोद! मेरे को ठंडा कर! मेरे को और कितना तड़पायेगा बहन के लौड़े! आअह हाआह आअहह आहह हह हह आहह!
मुझे भी गाली वाले ही सेक्स में मज़ा आता है, जिसमें दोनों पार्टनर खुलकर एन्जॉय करते हैं।
मुझे भाभियों को तड़पाने में बहुत ही ज़्यादा मज़ा आता है।
भाभी अब लंड के लिए तड़प रही थीं।
मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था।
थोड़ी देर बाद भाभी से रहा नहीं गया तो मुझसे अलग हो गयीं और मुझसे चोदने के लिए बोलने लगीं।
मैंने भाभी को बेड पर लिटाकर भाभी के चुचों को मुँह में ले लिया और एक हाथ से भाभी की चुचियाँ दबाने लगा।
एक हाथ से भाभी की चूत में उँगली करने लगा, जिससे भाभी बिल्कुल पागल हो गयीं।
थोड़ी देर ये करने के बाद मैंने भाभी को चौदने की पोज़ीशन बनाकर भाभी की गांड के नीचे तकिया लगाकर अपना लंड सेट किया।
भाभी की चूत में लंड सेट करके एक हल्का सा धक्का लगाया तो भाभी ऊपर की तरफ होने लगीं।
मैंने नीचे देखा तो मेरा अभी आधा लंड भी भाभी की चूत में नहीं गया और भाभी की सिसकियाँ शुरू हो गयीं- आआ अहह आअ हह आआहह आआहह! तुम मेरी चिंता मत करो! आअहह फाड़ डालो मेरी चूत को! मैं कितना भी मना बोलूँ तुम रुकना मत! आज मेरी चूत का भोसड़ा बना दो!
मैंने- तुम शादीशुदा हो फिर भी?
तब भाभी ने बताया कि उनके पति का लंड 3 इंच का है, वो भी बिल्कुल पतला।
मैंने भाभी को ओके बेबी बोलके एक तेज़ धक्का लगाया।
इस बार मेरा पूरा लंड भाभी की चूत में घुस गया और भाभी की चीख बहुत तेज़ निकली।
अगर कोई घर में होता तो उसे पता चल जाता कि घर में घमासान चुदाई चल रही है।
मैं थोड़ा रुका और भाभी के होंठों पर किस करने लगा।
थोड़ी देर बाद अपने आप चूतड़ ऊपर करके चुदने लगीं।
भाभी अब मेरा साथ देने लगीं तो मैं भी धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किये।
10 मिनट बाद भाभी का शरीर अकड़ने लगा। भाभी बोलने लगीं- अह हाअ आआ हाआह अह हाहह! और तेज़! और तेज़ राजा! फाड़ दो मेरी चूत को!
मैं और तेज़ झटके लगाने लगा और भाभी ने मेरी कमर को तेज़ भींचकर अपना पानी निकाल दिया।
भाभी मुझसे अलग हटने को बोलने लगीं कि मेरा शरीर दर्द करने लगा है।
उसके बाद मैं थोड़ा अलग होकर बेड पर भाभी की चुचियाँ पीने लगा और एक हाथ से भाभी की चुचियाँ दबाने लगा।
कुछ देर बाद भाभी गर्म होने लगीं तब मैंने भाभी की गांड की तरफ इशारा किया तो भाभी मना बोलने लगीं।
भाभी बोलने लगीं- गांड अभी किसी को नहीं मारने दी!
बहुत बोलने के बाद भाभी ने मुझे फिर कभी गांड देने का वादा किया।
मैंने भाभी से घोड़ी बनने को बोला।
फिर भाभी को घोड़ी बनाकर भाभी की चूत में पीछे से एक झटके में लंड डाल दिया, जिससे भाभी एकदम चीख उठीं!
उसके बाद भाभी को 15 मिनट तक लगातार चौदा।
इसके बाद मेरा होने वाला था तो भाभी से बोला- कहाँ निकलना है तो भाभी ने भीतर ही निकलने को बोला- बाद में दवा खा लूँगी!
फिर मैं और भाभी एक साथ झड़ गये।
अब तक दोनों ही बहुत ज़्यादा थक चुके थे और बेड पर ही सो गये।
जब आँखें खुलीं तो पता चला शाम के 5 बज चुके हैं।
भाभी की तबीयत भी बिगड़ चुकी थी और भाभी से चला भी नहीं रहा था।
उनकी हालत देखकर रुक गया और घर कॉल करके बोल दिया- दोस्त के यहाँ पार्टी है। मैं आज घर नहीं आऊँगा।
घर वालों ने भी रुकने को बोल दिया।
इसके बाद जब मैं बेड से उठा तो देखा बेडशीट पर खून और वीर्य के निशान हैं।
उसके बाद भाभी को उठाकर बाथरूम में ले जाकर नहलाया और खुद नहाया।
फिर दोनों रात में होटल गये खाना खाने।
उसके बाद भाभी के घर आकर फुल बॉडी मसाज की क्योंकि भाभी का पूरा शरीर दुख रहा था।
बाद में भाभी ने बताया कि आज तक उनके पति ने ऐसे चुदाई नहीं की और ना कभी चूत चटी।
उसके बाद रात में भाभी की तीन बार चुदाई की और सुबह भाभी और मैं साथ-साथ नहाये और भाभी की मसाज की।
उसके बाद मैं अगले दिन वहाँ से ऑफिस गया और फिर घर।
उसके बाद मेरी और भाभी की रासलीला हर दूसरे-तीसरे दिन होने लगी।
भाभी को मेरी चुदाई और मसाज करने का तरीका इतना पसंद आया कि भाभी ने मुझसे अपने कई सहेलियाँ चुदवायीं।
भाभी और भाभी की सहेलियों ने मुझे अब अपना चोदू बना लिया है और अब मुझे नयी-नयी सहेलियों से भी मिलवाती रहती हैं।
अब तो कुछ भाभी मेरी छुट्टी वाले दिन भी बुलाती हैं और मुझे महँगे गिफ्ट भी देती हैं।
अगली कहानी मैं लिखूँगा कैसे मैंने भाभी की गांड मारी और उनकी सहेलियों को चौदा।
अब आप सभी से नमस्कार।
आपको बस में मिली सेक्सी भाभी स्टोरी कैसी लगी?
ज़रूर बताएँ!
jayagrawal530@gmail.com