खान सेक्स कहानी में मन्नत खान को फेसबुक पर एक लड़का मिला, दोनों ने मिलने का सोचा और एक होटल में पहुंच गए. हमारा मकसद एक ही था जिस्म का मजा.
दोस्तो, मेरा नाम शब्बो है।
मैं आपके साथ अपनी खान सेक्स कहानी साझा करना चाहती हूँ।
वैसे तो मैं बहुत शर्मीली हूँ, लेकिन चूत पर ज़ोर नहीं।
एक बार फेसबुक से मेरी दोस्ती एक लड़के से हुई।
उसका नाम विराट था।
काफी वक्त तक दोस्ती रहने के बाद हमने मिलने का इरादा किया।
वो मेरे एरिया रात में आया था तो एक होटल में रुका।
मुझे उसने वहां का एड्रेस दिया।
मैं थोड़ा हिचकिचाई तो… लेकिन हमने फैसला किया कि वही ही ठीक है। अकेले रहेंगे थोड़ा।
वहाँ उसने खाने का सामान मँगाया, फिर बोला, “बुर्का उतार लो, गर्मी हो रही है!”
मैंने उसकी बात मान कर बुरका उतार दिया।
उसकी नज़रें मेरे सीने के उभार पर ललचा रही थीं।
खाना खाते ही हाथ धोकर वापस आया और मेरे सामने वाले सोफे पर बैठ गया।
वह मुझसे बोला कि वो मुझसे प्यार करता है।
मैंने भी इकरार किया कि मुझे भी उससे प्यार है।
वो घुटने के बल बैठकर मेरी गोद में सर रखकर बोला, “क्या मैं आपको किस कर सकता हूँ?”
न चाहते हुए भी मैंने हाँ में सर हिला दिया।
वो उठा और हाथ बढ़ाया मेरी तरफ।
मैंने हाथ थामा और खड़ी हो गई।
उसने मेरे होंठ चूसते हुए मुझे दीवार से सीने के बल सटा दिया।
मेरी गर्दन चूसते हुए उसके हाथ मेरे पेट से मेरे सीने की तरफ आ रहे थे।
अब वो मेरी चूची मसल रहा था।
उसने मेरी शर्ट के बटन खोले और मेरा दूध से सफेद बदन पर काली ब्रा देखकर पागल हो गया।
उसने शर्ट उतार फेंकी और मेरी चूचियाँ मसलते हुए मेरी गर्दन चूसे जा रहा था।
फिर मेरी ब्रा की स्ट्रैप को दाँतों से खींचते हुए मेरे हाथ से निकाल दी।
इसी तरह दूसरी भी उतार दी।
ब्रा बस मेरे निप्पल ढक पा रही थी।
उसने ब्रा के कप को दाँतों से खींचकर एक चूची पर झपटा और खींचकर पीने लगा।
मुझे इतना मज़ा आ रहा था कि मैं खड़ी नहीं रह पा रही थी।
दूसरे कप को मैंने खुद खींचकर निप्पल निकालकर उसके मुँह में देने पर विवश हो गई।
उसने ब्रा को मेरे बदन से उतारकर फेंक दिया और मुझे बाहों में भरकर बेड पर ले आया।
मेरी दोनों निप्पल को एक साथ चूसके मज़े से मैं वंचित थी।
अब मेरी चूत गीली होने लगी थी।
वो नीचे की ओर बढ़ा और मेरी पैंट उतार दी।
मैंने कारणवश पैंटी भी नहीं पहनी थी।
उसने जाँघें चूमते हुए अब वो मेरी चूत पर था।
मैं बेकरार थी कि वो कब मेरी फाँकें भी चूसेगा।
वो मेरी चूत के नशे से खुद को नशे में कर रहा था।
उसने जैसे ही चूत में उँगली डाली, मैं तड़प गई, “आह! क्या कर रहा है?”
“अमृत नहीं पीएगा, विराट?”
मुझे इस हाल में देखकर वो हँस पड़ा और उँगली चूत से निकालकर चूसी।
वो यही कर रहा था।
मैंने बाल पकड़ के अपनी चूत उसके मुँह पर घिस दी।
मेरी तड़प बढ़ रही थी।
वो मुझे तड़पा रहा था।
फिर मैंने उसे धक्का दे दिया।
वो बेड पर लेट गया और मैं उसके मुँह पर बैठकर चूत को घिसने लगी।
वो ज़बान से चूत को बस घिस रहा था।
मुझे उस पर गुस्सा आने लगा तो मैं उठकर कपड़े पहनने लग गई।
वो उठा, मुझे दीवार से फिर सटा दिया और ज़मीन पर बैठ गया, मेरा एक पैर उठाया और कंधे पर रख लिया।
फिर चालू हुआ स्वर्ग का रास्ता।
वो क्या चाट रहा था!
मैं बराबर उसके मुँह पर चूत घिस रही थी।
फिर उसने होंठों से क्लिट फाँस लिया।
मैं तड़प गई।
मेरी चूत ने रस छोड़ना शुरू कर दिया और वो सुडुप-सुडुप करके सब चाट जा रहा था।
उसने चूत में जीभ घुसाई और अंदर का माल चाटने लगा।
मैं झड़ रही थी।
उसने मुँह थोड़ा दूर कर लिया लेकिन रस की एक बूँद नीचे नहीं गिरने दी।
मैं बोली, “भी कपड़े उतार दे, चोद दे मुझे!”
लेकिन वो चूसने पर बज़िद था, बोला, “एक बार और चूत का रस पीने दे, शब्बो! मान जा प्लीज़!”
मैं हार मान गई और दोबारा तैयार हो गई स्वर्ग जाने को।
उसने मुझे गोद में उठाया, निप्पल को मुँह में लेकर खींचा और पहुँच गया चूत पर।
मेरे पैर फैला दिए उसने और जुट गया पीने।
वो मेरी चूची मसल रहा था और मैं फिर झड़ गई।
अब उसने अपना लौड़ा निकाला और मुझसे बोला, “चूस!”
मैंने कहा, “तू चूत शांत कर दे, अगली बार मुँह से निकाल दूँगी।”
फिर उसने लौड़े को चूत के मुँह पर रगड़ा और धक्का मार दिया।
मेरी चूत की दीवारों से लगता हुआ लौड़ा मेरी बच्चेदानी तक पहुँच गया।
मेरी कामुक चीखें उसकी उत्तेजना को बढ़ा रही थीं।
वो लगातार शॉट पे शॉट मार रहा था और मेरी चूत पानी पर पानी छोड़े जा रही थी।
मैं थक गई और उसने लौड़े को मुँह में लेकर उसे शांत किया।
उस दिन उसने मुझे 5 बार चोदा।
मुझे चलने में परेशानी हो रही थी।
पर मुझे चुद के मज़ा बहुत आया।
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