भाई बहन Xxx लव स्टोरी में मैं और दीदी शहर में कमरा लेकर पढ़ाई करते थे. दीदी मुझे वासना की नजर से मुझे छूती थी, मेरा गाल चूम लेती थी. एक दिन उसने …
दोस्तो, मैंने raatkibaat पर काफ़ी सेक्स कहानियां पढ़ीं, तो लगा कि मैं भी अपनी आपबीती को सेक्स कहानी के रूप में आप सबके साथ साझा करूं.
मैं राजस्थान से हूँ. ये कोई झूठी कहानी नहीं है, लास्ट 7 सालों से चल रही एक हकीकत है.
मेरे घर वालों ने मुझे कंप्टीशन की तैयारी के लिए बड़ी दीदी के साथ अजमेर भेज दिया था.
वहां पर हम दोनों भाई बहन रूम लेकर कंप्टीशन की तैयारी कर रहे थे.
हम दो ही भाई बहन हैं.
मेरी दीदी मुझसे उम्र में 2 साल बड़ी है. उस वक्त मेरी उम्र 19 साल थी.
ये भाई बहन Xxx लव स्टोरी आज से 7 साल पहले की है.
अब तो हम दोनों को जॉब करते हुए 5 साल हो गए हैं लेकिन हमारे बीच जिस्मानी रिश्ते अभी भी कायम हैं.
मैं झूठ नहीं लिखता हूँ या बढ़ा चढ़ा कर नहीं लिख रहा हूँ, जो हमारे बीच हुआ था … वही लिख रहा हूँ.
अधिकतर कहानियों में मैंने पढ़ा था कि दरवाजा खुला था और नायिका ने जानबूझ कर बुलाया और मैंने जाकर उसकी चुत फाड़ दी. मेरा लंड 7-8 इंच का है. लंड पेलने से उसको दर्द हुआ और वह चिल्लाने लगी.
पहले मैं समझता था कि ये सब कुछ झूठ होता है, सबके साथ नार्मल सेक्स होता है.
हां यह सही है कि आप किसी महिला को कितना समय देते हो और उसको कितना संतुष्ट करते हो. यही मुख्य बात होती है.
लंड के बड़ा छोटा होने से कोई फर्क नहीं पड़ता, बस अपनी पार्टनर को चोद कर संतुष्ट करो और वह ख़ुश हो जाती है.
मैं और दीदी साथ में पढ़ते थे और एक ही रूम में साथ रहते.
हम दोनों ग्रामीण परिवेश से आते हैं तो एकदम सरल स्वभाव के हैं और बचपन से आज तक एक साथ एक ही बिस्तर पर सोते आए हैं.
जब अजमेर जैसे शहर में आए तो बहुत कुछ ऐसा देखने को मिला, जो हमारे लिए नार्मल नहीं था.
बहुत सारी बातें धीरे धीरे हमारे मन में घर करने लगी थीं और जवानी का मतलब समझ में आने लगा था.
शुरू के चार महीने तक हम दोनों भी साधारण तरीके से ही रहते रहे थे.
पहले भी हमारे बीच टचिंग हो जाती थी लेकिन उसका कोई मतलब ही समझ में नहीं आता था.
पर जबसे बड़े शहर का चाल चलन देखा तो धीरे धीरे एक दूसरे की बॉडी को टच करने में कुछ अहसास होने लगा.
फिर डबल मीनिंग में बात करना शुरू हो गया और साथ साथ पार्क में घूमने जाना, साथ साथ मूवीज देखने जाना, यह सब होने लगा.
अब हम दोनों भाई बहन के बीच ये सब नार्मल होने लगा था.
हम दोनों यह सब करते हुए एक दूसरे को देख कर अर्थपूर्ण तरीके से मुस्कुराने लगे थे.
एक साथ रहने के लगभग 6 महीना बाद ये घटना हुई थी.
वह सर्दी का मौसम था.
मैं और दीदी एक ही बिस्तर में साथ साथ सोते थे, तो उस दिन सर्दी के कारण हम दोनों एक दूसरे के साथ चिपक कर सोने लगे.
उस दिन एक हॉट मूवी देख कर आए थे तो हल्का सा कुछ कुछ होने लगा था, लेकिन हम दोनों सामान्य तरीके से सोते रहे.
अगली रात को दीदी मुझसे कुछ ज़्यादा ही चिपक कर सो रही थी.
उस रात में उसकी सांसें कुछ तेज चलने लगी थीं.
मैंने पूछा तो उसने कुछ नहीं बताया और चुपचाप मुझे पकड़ कर सो गयी.
मैं कुछ समझ तो गया था और मेरा हथियार भी कुछ कुछ बड़ा सा हुआ था लेकिन अन्दर से गांड फट रही थी और डर भी था कि दीदी क्या सोचेगी.
वैसे 26 साल की लड़की और 23 साल का लड़का साथ सो रहे थे, तो सांसें सामान्य नहीं रहती हैं, यह मुझे बाद में समझ में आया था.
उस रात दीदी ने एक बार मेरे लंड को भी पकड़ने की कोशिश की थी लेकिन तब मैं गहरी नींद में था, तो मुझे हल्का सा ही अहसास हुआ था, पर मैं सोता रहा था.
सुबह मुझे याद आया था कि दीदी ने कुछ किया था.
मैंने अपने लौड़े को टटोल कर देखा और जांघिया को भी देखा कि कहीं से कुछ गीली हुई हो या कोई और बात हुई हो, उधर कुछ भी असामान्य नहीं था.
फिर अगली रात को दीदी ने प्यार से मेरे गाल पर किस किया, तो मैंने भी वापस कर दिया.
यह हम दोनों के बीच यदा-कदा हो जाता था … मतलब सामान्य ही था.
उस दिन दीदी ने फिर से चुंबन किया तो मैंने भी फिर से कर दिया.
इस बार दीदी ने हिम्मत करके मेरे होंठों को अपने होंठों से लगाया और चूसने लगी.
मैं समझ नहीं पाया कि यह क्या हुआ?
मगर अच्छा लग रहा था तो चुपचाप साथ देता रहा.
अगले 5 मिनट तक हम दोनों अपने होंठों से पूरी मस्ती से चुंबन करते रहे.
फिर मैंने दीदी के मम्मों को उसके कपड़ों के ऊपर से पकड़ कर दबाया.
इस पर दीदी ने कोई विरोध नहीं किया और अपनी आंखें बंद करके मुझे अपने ऊपर खींच लिया.
हम दोनों अभी तक चुप थे और हम दोनों की सांसें तेज तेज चल रही थीं.
दीदी ने अपने हाथ से मेरे नीचे के आइटम को पकड़ा और वह उसे दबाने लगी.
मैं ऊपर से उसके मम्मों को दबा रहा था और हम दोनों एक दूसरे के होंठों को बेताबी से चूस चूम रहे थे.
कुछ मिनट ऐसा करने के बाद मैंने दीदी के नीचे हाथ फेरा, तो दीदी ने खुद अपने हाथ से अपनी सलवार को खोल दिया.
मैंने भी अपना लोअर नीचे कर दिया और दीदी के ऊपर वापस चढ़ गया.
मैं उसके कुर्ते और ब्रा को ऊपर करके उसके मम्मों को चूसने लगा और एक हाथ से दीदी की चुत को सहलाने लगा.
दीदी मेरे लंड को पकड़ कर चुत पर लगाने की कोशिश करने लगी, तो मैंने खुद अपने हाथ से अपने लंड को पकड़ा और उसका टोपा दीदी की चुत पर टिका दिया.
फिर धीरे से मैंने धक्का दिया तो मुश्किल से ही सुपारा अन्दर गया होगा कि दीदी को दर्द होने लगा.
हम दोनों पहली बार सेक्स कर रहे थे और दोनों ही इस काम में नए थे, बस पढ़ा सुना था कि सेक्स में लंड चुत में पेला जाता है.
हम दोनों आज वह सब सच में कर रहे थे.
धीरे धीरे मैंने सुपारे को अन्दर पेला और अपने हाथ से दीदी के मम्मों को मसलते हुए उसे चूमता गया.
दीदी ने अपने हाथ से अपने एक दूध को मेरे मुँह में देने की कोशिश की तो मैं उसके एक दूध को अपने मुँह में लेकर मस्ती से चूसने लगा.
इससे शायद दीदी को मजा आया और उनका दर्द कम होने लगा.
उस वक्त मुझे चुदाई के समय होने वाले दर्द का अहसास हुआ कि सेक्स कहानियों में दर्द की बात सही लिखी होती है.
अब दीदी ने अपने पैर खोल लिए और मेरे पैरों से अलग करके ऊपर हवा में उठा दिए.
मुझे अपने लौड़े को चुत में पेलने में आसानी हुई और मैं अपना लंड अन्दर करने लगा.
कुछ ही देर में लंड चुत में घुस गया.
दीदी ने मेरी गांड पर हाथ रख दिया और मुझे रुकने का इशारा किया.
मैं रुक गया और मुझे अहसास हुआ कि लंड ने चुत में जगह बनाना शुरू कर दिया था.
कुछ एक या दो मिनट बाद दीदी ने अपना हाथ हटाया और नीचे से अपनी चुत उठाई.
मैं फिर से धक्का देने लगा और अब हम दोनों को चुदाई का मजा आने लगा था.
लगातार कुछ मिनट तक झटका देने के बाद मेरा रस दीदी की चुत के अन्दर छूट गया और मैं हाँफता हुआ दीदी के ऊपर ही ढह गया.
दीदी ने भी मुझे कसके पकड़ लिया, शायद उसे भी मजा आ गया था.
हम दोनों यूं ही अस्त व्यस्त कपड़ों में एक साथ सोए रहे. बड़ी गहरी नींद आई थी.
ऐसा लगा मानो सारी थकान दूर हो गई थी.
जब मैं सुबह उठा, तब तक दीदी ने स्नान कर लिया था.
उसने बिस्तर की चादर को निकाल कर धो दिया था और सूखने डाल दिया था.
मैं यह सब देख कर समझ गया कि शायद रात को चादर पर कहीं कोई लाल निशान या दाग आ गया होगा.
नाश्ता करके हम दोनों पढ़ने चले गए.
सारा दिन हम लोग सामान्य थे.
शाम को दीदी और मैं उधर की लोकल चौपाटी पर घूमने गए और मस्ती की.
मैंने देखा कि दीदी आज कुछ ज़्यादा ही ख़ुश लग रही थी.
शाम को वापस कमरे में आकर हम दोनों ने थोड़ी पढ़ाई की और सोने आ गए.
कुछ ही देर में फिर से वही मज़ा लेने लगे.
आज हम दोनों ने पूरे कपड़े उतार कर पूरे नंगे होकर चुदाई का मजा लिया था.
अब मैं और दीदी दिन में बहन भाई रहते और रात को बिस्तर में पति पत्नी बन कर रहते.
एक साल तक यह सब Xxx चलता रहा.
उसके बाद मेरी जॉब लग गई.
ये मेरी किस्मत थी या और कुछ … मेरी जॉब भी अजमेर में ही लग गयी.
अब मैं ड्यूटी पर जाता और दीदी दिन भर पढ़ती रहतीं.
रात को हम दोनों सेक्स का फुल मज़ा लेते.
उधर घर वालों ने दीदी का रिश्ता फिक्स कर दिया था.
दीदी ने मम्मी से बात करके साल भर शादी नहीं करने को बोला, जिसे घर वाले मान गए.
अब दीदी और मैं रात को पूरी तरह से खुल्लम खुल्ला पति पत्नी की तरह नंगे रहने लगे.
हर रोज सेक्स वीडियो देख कर नए नए तरीके से सेक्स करते रहते.
मुँह में लेकर ओरल सेक्स का मजा लेते और बाथरूम सेक्स का मजा तो रोज एक साथ नहाने के समय लेते ही लेते थे.
उधर दीदी को घोड़ी बना कर उसकी गांड में शैंपू लगा कर लंड को घुसेड़ने की कोशिश करता रहता.
कुछ ही दिनों में दीदी पीछे से भी चुदवाने लगी थी.
इस्सी बीच मेरा रिश्ता भी तय हो गया.
फिर जब दीदी की जॉब लगी तो घरवालों ने और नहीं रुकने की कह दी और दीदी की शादी कर दी.
दीदी ससुराल चली गयी, लेकिन वह मुझसे एक वादा करके गयी कि वह इस रिश्ते को जिंदगी भर निभाएगी और ये राज हम दो के बीच ही रहेगा.
उसके बाद मेरी भी शादी हो गयी.
आज भी हम दोनों की जॉब लगे और शादी हुए 5 साल हो गए, लेकिन हमारा रिश्ता क़ायम है.
एक विशेष बात जो मैंने महसूस की, वह यह कि जितना मजा मुझे पत्नी से सेक्स करने में नहीं आता, उससे ज़्यादा दीदी को चोदने में आता है.
दीदी भी खूब मजा देती है और उसको भी मेरे साथ अपने पति से भी ज़्यादा मजा आता है, पता नहीं ऐसा क्यों है!
आज भी जब वाइफ अपने घर जाती है, तो दीदी खाना बनाने के बहाने 5-10 दिन मेरे साथ रहने आ जाती है और उन 5-10 दिनों में वह अपनी ड्यूटी पर भी मेरे घर से ही जाती है.
अभी भी मेरी जॉब घर से दूर है और दीदी के शहर में ही है. जोकि मैंने जानबूझ कर लिया हुआ है.
बीवी के नहीं रहने के दिनों में हम दोनों खुला सेक्स करते हैं.
कभी कभी सोचता हूँ कि ये गलत है, पर क्या करें, दीदी का प्यार छूटता ही नहीं है.
आज भी मैं सोचता हूँ कि इस रिश्ते को क्या नाम दूँ!
मेरी इस सच्ची भाई बहन Xxx लव स्टोरी पर आपके विचार आमंत्रित हैं.
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