भाभी की चुदाई वाला मैरिज डे

Views: 1 Category: Bhabhi Sex Story By delhikaking Published: August 27, 2026

प्यासी भाभी चुदाई स्टोरी में भैया की शादी से पहले ही भाभी मुझे और मैं भाभी को भा गया। शादी के बाद भाभी की प्यास तो भैया भुझा रहे थे लेकिन मेरी अन्तर्वासना का क्या? वो कैसे तृप्त हुई?

मैं राज हूँ.. मेरी उम्र 24 साल.. कद 5 फीट 8 इंच.. परफ़ेक्ट बॉडी है.. मैं दिल्ली में रहता हूँ और मैं अच्छी-ख़ासी जॉब भी करता हूँ।
अन्तर्वासना के ज़्यादातर पाठक अपनी कहानी लिखने से अपने आपको रोक नहीं पाते.. मैं भी उन्हीं में से एक हूँ। मैं भी और दूसरे पाठकों की तरह एक नियमित पाठक हूँ.. जो कहानी पढ़-पढ़ कर अब अपनी भी लिखना चाहता है।

यह सिर्फ़ एक कहानी नहीं बल्कि सच्चाई है.. आज कल लड़का हो या लड़की.. सबके सब शादी से पहले ही सेक्स का मज़ा चख लेते हैं।

मैं तो बचपन से ही एक नंबर का चुदक्कड़ था.. पर अब तक तो ख्यालों में ही मेरा काम हो जाता था। अब जवानी चरम पर आ गई है.. ख्यालों को हक़ीकत में बदलने का समय आ गया है। मेरी कोशिशें भी जारी हैं।
अब अपने कहानी पर आता हूँ।

यह बात ज़्यादा पुरानी नहीं.. यही कोई 3 साल पहले की है, मेरे चाचा के लड़के की शादी होनी थी, सब कुछ लगभग तय हो गया था.. सिर्फ़ भाभी के कपड़ों की कुछ नापें लेनी रह गई थीं.. जैसे ब्लाउज लहंगा आदि।
घर में काफ़ी विचार-विमर्श के बाद मुझे भैया की होने वाली ससुराल में जाने को कहा गया।

मैं भी अजीब से उत्साह और सोच में पड़ गया था, जैसे क्या बात करूँगा भाभी से? कैसी होगी वो? इंप्रेस कर पाऊँगा या नहीं?

खैर.. अगले दिन पूरी तैयारी के साथ मैं भाभी से मिलने गया, एकदम निर्दोष और साफ सुथरे मन के साथ.. वहाँ जाकर मेरा मन बदल गया और बदले भी क्यों ना.. बिना शादी के भाभी क्या लग रही थी.. जिसे शब्दों में वर्णन करना मुश्किल है।
उनके मम्मे कम से कम 36 नाप के तो होंगे ही.. और इतने भारी मम्मों वाली लड़की मेरे ऊपर कयामत लाने के लिए काफ़ी थी।

खैर.. वहाँ मेरा काफ़ी स्वागत हुआ, भाभी ने भी बहुत प्यार जताया था।
भैया से पहले मैंने ही देखा था भाभी को.. पहली मुलाकात के बाद ही हम दोनों के बीच कुछ हो गया।

फिर कुछ दिनों बाद शादी हो गई.. भाभी मेरे घर में आ गईं।
मैं प्यासा.. मौके की तलाश में था लेकिन भाभी की प्यास तो भैया बुझा रहे थे.. उन्हें मेरी फ़िक्र कहाँ थी?

करीब एक महीने बाद भैया को वापस जॉब पर जाना था। वो भाभी को ले जाना चाहते थे.. लेकिन घरेलू वजह से प्लानिंग की गई कि भाभी 6 महीने बाद जाएंगी। तब तक घर को अच्छी तरह समझ जाएंगी।

भैया वापस चले गए.. मैं मन ही मन बहुत खुश था.. लेकिन अपने मन की बात को मैंने कभी किसी के सामने जाहिर नहीं किया था। यहाँ तक कि भाभी के सामने भी नहीं जाहिर होने दिया था।
अब मुझे भाभी की हरकतों से ऐसा लगने लगा था कि मेरे से ज़्यादा भाभी को मेरी ज़रूरत है।

हम दोनों ही ऐसे मौके की तलाश में हरदम बने रहते कि जब घर में कोई ना हो।
फिर खूब हँसी-मज़ाक होता.. मज़ाक में उन्हें छूने में एक अजीब सुखद आनन्द आता था। कभी-कभार मज़ाक-मज़ाक में भाभी के मम्मे मेरे से छू जाते.. तो वो कोई ख़ास प्रतिक्रिया नहीं देती.. इससे मेरा हौसला और बढ़ जाता था।

ऐसे ही शादी को एक साल पूरा होने वाला था और हमारे बीच कोई गहरा शारीरिक रिश्ता नहीं हुआ था।
इस बीच भैया एक बार आए भी और चले भी गए।

शादी के साल पूरे होने पर मैरिज डे मनाने का प्रोग्राम था लेकिन भैया को ऑफिस से अवकाश नहीं मिल सका।

मैरिज डे के दिन संयोग ऐसा था कि घर के लोगों को एक रिश्तेदारी में जाना था.
घर पर सिर्फ़ मैं, भाभी और मेरा कजन रह गया था।

मैं मार्केट से भाभी के लिए गिफ्ट लाने गया.
वापस आते-आते शाम हो गई।

जब घर आया तो भाभी भैया से मोबाइल पर बात कर रही थीं और छोटा भाई कहीं बाहर गया था।

भाभी को पता नहीं था कि मैं गिफ्ट लाया हूँ। उनके सामने गिफ्ट दिया तो उनकी ख़ुशी साफ चेहरे पर झलक रही थी।
मैं उन्हें फोन पर बात करने में डिस्टर्ब नहीं करना चाहता था इसलिए उनके पास बैठ गया।

यूँ ही बात करते-करते वो लेट गईं.
भैया कुछ रोमाँटिक बातें कर रहे थे।
भाभी भी रोमाँटिक हो रही थीं.. लेकिन मेरे होने से ज़्यादा नहीं बोल रही थीं।
अब मैं भी भाभी के बगल में लेट गया.. उनके बदन से पागल बना देने वाली खुश्बू आ रही थी.. मैं मदहोश हो रहा था।

कुछ देर ऐसे ही मज़ा लेता रहा.. फिर लेटे हुए ही अपना एक हाथ मैंने भाभी के पीठ पर रख दिया.. उन्होंने हटाया भी नहीं.. मैं अब भाभी के कान के पास सट गया.. ताकि भैया की बातें सुन सकूँ।

हम दोनों के बीच अब कोई दूरी ना बची थी.. सिर्फ़ कपड़े बच गए थे.. जो हमारे बीच खलल डाल रहे थे। लेकिन ये सब सिर्फ़ मैं सोच रहा था.. मेरी कोशिश हो रही थी। कहीं ना कहीं मेरे मन में डर था कि कहीं भाभी कुछ बोल ना दें.. डाँट ना दें तो मैं हर कदम फूँक फूँक कर रख रहा था।

अब मैंने धीरे से अपना एक पैर भाभी के मस्त गोल मांसल चूतड़ों पर रख दिया। एक बार भाभी ने हटा दिया.. मैंने फिर कुछ देर बाद रख दिया।
अबकी भाभी भैया की बातों में व्यस्त थीं। धीरे-धीरे मैंने पूरी तरह भाभी को अपनी बाँहों में घेर सा लिया।
कुछ देर ऐसे ही रहा.. फिर अपने पैरों को भाभी के चूतड़ों पर साड़ी के ऊपर से ही सहलाने लगा।

उन्हें अब अच्छा लगने लगा था। मैं उनके मम्मों को छूना चाहता था.. अपने बाएं हाथ से भाभी को पीठ के ऊपर से पकड़ कर दाएँ हाथ को भाभी के मम्मों पर फिराने लगा।

यह सब मैंने इतना धीरे-धीरे आराम से किया कि भाभी को पता भी ना चला कि मैंने शुरू कब किया था। लेकिन उनको तो अब मज़ा आने लगा था, एक तरफ अपने पति से रोमाँटिक बातें कर रही थीं.. दूसरे तरफ देवर उन्हें पति के वहीं होने का अहसास करा रहा था।

मुझे अब बहुत आनन्द आने लगा था.. क्या मांसल चूचियाँ थीं भाभी की।

कुछ ही देर में मुझे अहसास हुआ कि अब उनके मम्मे अब कड़क होने लगे थे। भाभी की साँसें गरम हो रही थीं.. बस भैया से बात करने के कारण वो नहीं बोल पा रही थीं.. अगर वो कुछ भी बोलतीं.. तो भैया को पता चल जाता कि वहाँ मैं हूँ और फिर उन्हें शक हो सकता था।

इसी परिस्थिति का फ़ायदा मेरे हाथों ने उठाना शुरू कर दिया और मैं अपनी मदहोश सेक्सी भाभी के सुडौल कड़क चूचों को दबाने लगा। थोड़ी देर ऊपर से ही खेलने के बाद अब मैं ब्लाउज के अन्दर हाथ डालने लगा और डाल भी दिया।

मैं यहाँ बता नहीं सकता कि कितनी मुलायम लग रही थी भाभी की चूचियाँ.. मेरे हाथ ने अपने कारनामे दिखाते हुए उनके एक निप्पल को छुआ.. तभी भाभी की बातें ख़त्म हो गईं और वो अचानक से पलटीं और मेरे से दूर हो गईं।
बोलीं- ये आप क्या कर रहे थे?
मुझे थोड़ी सी बनावटी नाराज़गी सा महसूस हुआ.. जिसे मैंने पल भर में समाप्त कर दिया।

कुछ जबाव देने के बदले मैंने भाभी के पास जाकर सीधे उन्हें किस करना चालू कर दिया। उन्होंने भी बिना विरोध के मेरा साथ दिया और फिर जोरदार किसिंग शुरू हो उठी।

तभी मेरा मोबाइल बजने लगा.. पापा का कॉल आ रहा था, रिसीव किया.. तो बोले- जल्दी बाहर आओ.
वो घर के बाहर गेट खुलने का इंतजार कर रहे थे, खड़े लण्ड पर धोखा हो गया था।

मैं अनचाहे मन से जाने लगा तो भाभी बोलीं- आपको अब जाने नहीं दूँगी. आपने मेरी भूख को जगा दिया है। इसे अब आपको ही मिटाना होगा.
मैं इस वादे के साथ कि आज आपकी मैरिज डे वाली सुहाग-रात को सूनी नहीं होने दूँगा। यह कह कर मैं बाहर निकल गया।

बाहर पापा को देखा तो वे मुझे पेपर देकर बाहर से ही निकल गए.. बोले- कल शाम तक ही आ पाऊँगा।
और चले गए.
मेरे तो बल्ले-बल्ले हो गई थी।

शाम तो हो ही चुकी थी. अब जल्दी से रात होने का इंतजार करने लगा।
वो भी हुई लेकिन काफ़ी इंतजार के बाद.
मेरा मतलब इंतजार की घड़ी वाकयी लंबी हो गई थी।
भाभी ने स्पेशल खाना बनाया था, हम तीनों (मैं भाभी और मेरा भाई) ने खूब मज़े में खाया।

लेकिन भाभी की आँखें बीच-बीच में मेरी आँखों से मिल जातीं.. और बहुत कुछ कह जातीं।
पहली बार हमने आज आँखों से भी सेक्स करना सीख लिया था।

मेरी प्यारी भाभी सिर्फ़ भाभी नहीं… बल्कि सेक्स की देवी हैं, सेक्स की टीचर हैं, सेक्स का प्रतिबिम्ब हैं, उनके अंग-अंग में आकर्षण है, हर अदा में आकर्षण है।

भोजन ख़त्म हो गया.
अब चोदन की बारी थी।

मैंने भाभी को चुपके से बता दिया कि आधे घंटे बाद आता हूँ। तब तक ‘शिवम’ को किसी तरह सुला देना।
मैं मार्केट की तरफ चला गया।

आधे घंटे बाद जब मैं वापस आया तो भाभी ने अपना काम पूरा कर दिया था, शिवम सो गया था.
तसल्ली के लिए हमने उसका कमरा बाहर से भी बंद कर दिया।

अब मैं भाभी के कमरे में गया।
कमरे का वातावरण.. मौसम.. माहौल.. खुश्बू.. से मैं दंग रह गया।
भाभी किसी नई दुल्हन के तरह सज के बैठी थीं.. जैसे आज सुहागरात हो।
मैं भी आज भाभी को भैया के ना होने के अहसास को नहीं होने देना चाहता था, पूरे मूड में पलंग पर पहुँच गया.. घूँघट उठाया तो भाभी मंद-मंद मुस्करा रही थीं..

अब मैंने भाभी को धीरे से पलंग पर लिटा दिया और खुद भी बगल में लेट गया.. बिना बोले सब काम हो रहा था।
भाभी आज रात पूरी तरह मेरी थीं.. इसलिए मैं कोई जल्दी नहीं करना चाहता था।

फिर उनके होंठों पर अपने होंठों को रख दिया और चूमाचाटी शुरू हो गई.

क्या रसभरे होंठ थे भाभी के.. इतने मज़े मैंने पहले किसी लड़की के साथ भी नहीं लिए थे जितनी भाभी मुझे दे रही थीं।
मैं उन्हें पूरा पी जाना चाहता था.. करीब दस मिनट की किसिंग के बाद मैंने साड़ी खोलना शुरू किया।

साड़ी उतारने के बाद, ब्लाउज फिर पेटीकोट.. अब भाभी के बदन पर सिर्फ पैंटी और ब्रा बचे थे।
आप अनुमान लगा सकते हैं कि हुस्न की मल्लिका.. मेरी भाभी के गोरे बदन पर काले-काले दो वस्त्र कैसे लग रहे होंगे?
मैं ऐसे ही उन्हें घंटों देखने को तैयार हूँ.. लेकिन उस समय उससे भी सुनहरी चीजें उन काले वस्त्र के अन्दर छुपी थीं।

अब मैंने भाभी की ब्रा को खोल दिया उनके दोनों कबूतर फड़फड़ा कर बाहर निकल आए। मैंने उनकी मालिश शुरू कर दी, दोनों मम्मों को चूसते चूसते लाल कर दिया। लगभग 15 मिनट मम्मों के साथ खेलने के बाद प्यास लग गई थी लेकिन पानी की जगह आज अमृत मिलने वाला था।

भाभी ने अमृत द्वार पर जो पैंटी पहनी थी.. उसको मैंने बिना समय गंवाए उतार दिया.
हाय.. क्या चूत थी… देखने पर कोई कह नहीं सकता था कि पहले कभी ये कभी लण्ड के झटके खा चुकी है.. एकदम क्लीन शेव्ड चूत.. गुलाबी फुद्दी.. गोरी-गोरी जाँघों के बीच.. दुनिया का सबसे सुंदर नज़ारा मेरे सामने था।

उस जगह से मेरी मादक नज़रें हटने का नाम ही नहीं ले रही थीं।

अब अपने प्यासे मुँह को रसपान करने में लगा दिया, जीभ से ही मैं भाभी को चोदने लगा था.. भाभी भी कमर उठा रही थीं.. जिसका मतलब था.. वो मज़े ले रही थीं।

दस मिनट के बाद भाभी झड़ गईं.. मैंने सारा अमृत पी लिया।

अब भाभी उठीं और मेरे लण्ड की तरफ बढ़ीं.. मेरी पैंट खोलकर एक ही झटके में लण्ड बाहर निकल लिया।
मेरा कड़क लौड़ा देखकर वे ख़ुशी से पागल हो गईं.. बोलीं- इतना बड़ा?
मैंने बोला- हाँ.. अभी 7 इंच का ही है चूसने पर 9 का हो जाएगा।

यह सुनते ही भाभी ने अपने मुँह में लण्ड को लॉलीपॉप की तरह ले लिया.. फिर मुँह को ऊपर-नीचे करते हुए मेरे लण्ड को ही चोदने लगीं।
करीब 5 मिनट में ही मुझे लगा मैं झड़ने वाला हूँ.. तो मैंने भाभी से छोड़ देने को कहा।
भाभी लण्ड बाहर निकल कर देखना चाहती थीं कि वाकयी 9 इंच का हुआ या नहीं.. मेरा खड़ा हलब्बी लौड़ा देखकर बोलीं- राज आज मैं तुम्हारे लण्ड की फ़ैन हो जाऊँगी।

फिर मैंने भाभी को मुँह ऊपर करके पलंग पर लिटा दिया और उनके दोनों पैरों को ऊपर करके फैलाकर अपने लिए जगह बनाई, अपने मुस्टंड लण्ड को चूत के द्वार पर रख दिया।
भाभी अभी से ही सिसकारी लेने लगी थीं..

मैंने हल्का सा धक्का दिया तो भाभी धीरे से चिल्लाईं- थोड़ा धीरे राज.

फिर मैंने धीरे-धीरे 4-5 बार अपनी कमर को हिलाया और एक जोरदार झटका दिया तो आधे से ज़्यादा लण्ड भाभी की चूत में समा चुका था।

कुछ सेकेंड ऐसे ही रहने के बाद मैंने कमर को हिलाना शुरू कर दिया.
भाभी भी अब मज़े लेने लगीं.. सिसकारिया लेने लगीं.. ‘सस्स्स सिईईई.. आहह.. राज चोदो और और..’
मेरा उत्साह और बढ़ जाता और मैं और प्रचंड झटके लगाने लगता।

कुछ देर बाद मैंने अपने पसंदीदा घोड़ी स्टाइल में भाभी को सैट किया और पीछे से भाभी की चूत में लण्ड डाल दिया, इस बार पूरा का पूरा हथियार जड़ तक चला गया था।

भाभी की चूत परपरा उठी।

फिर झटके भी तेज होने लगे.. भाभी की कामुक आवाजों से कमरा गूँज रहा था.
हम दोनों बेख़बर चुदाई का मज़ा ले रहे थे।
भाभी बोलीं- आह्ह… और तेज करो.. मैं झड़ने वाली हूँ.

मैंने अपनी पूरी ताकत से स्पीड पकड़ ली.. करीब दो मिनट बाद हम दोनों एक साथ अपने चरम पर पहुँच गए, झरने बह उठे और हम दोनों दो जिस्म एक जान हो गए।
फिर कुछ देर साथ में नंगे ही लेटे रहे।
उनका मैरिज डे बिना पति के भी सफल हो गया था।

आपको कैसी लगी मेरी भाभी की चूत चुदाई?
मुझे ईमेल करें.
delhikaking@gmail.com

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