हार्ड फक स्टोरी में औलाद पैदा करने के लिए मैं अपने चाचा के बेटे से बार बार चुदती रही. बीच में अपने पति का लंड भी चूत में डलवाती रही ताकि गर्भ रुके तो उसे शक ना हो.
फ्रेंड्स, मैं पूनम आपको अपनी बहन वृति चौधरी के सहयोग से अपनी सेक्स कहानी सुना रही थी, जिसमें मैंने अपने भाई से ही अपनी चुत चुदवा कर अपनी कोख हरी करने का प्रयास किया था.
कहानी के पिछले भाग
भाई के लंड से मेरी चूत फट गयी
में अब तक आप पढ़ चुके थे कि मेरे भाई ने मेरी चुत में अपना मोटा लंड पेल रखा था, जिसे मैं झेल नहीं पा रही थी और जोर से चिल्ला भी नहीं पा रही थी.
अब आगे हार्ड फक स्टोरी:
भाई के मोटे लंड से चुदने के कारण मुझे बहुत दर्द हो रहा था मगर मैं किसी तरह से इस दर्द को मजा समझती हुई अपना मुँह तकिए से दबाकर लंड झेलने में लगी थी.
मुझे उस समय अपने भाई का लंड मेरी चूत के लिए एक सही डंडा लग रहा था क्योंकि उसका लंड बच्चेदानी तक जा रहा था.
मैं उसके वीर्य से मैं गर्भवती हो सकती थी क्योंकि जिसके लंड में ही इतनी ताकत है तो वीर्य में भी बहुत ताकत होगी.
मेरे भाई को मेरी कमसिन चूत चोदने को मिल रही थी तो वह मस्ती से फ्री में मिली चुत की धकापेल चुदाई करने में मस्त था.
थोड़ी देर की चुदाई के बाद अब मुझे भी मजा आने लगा था और अब मैं भी चुदाई में अपने भाई का साथ देने लगी थी.
मैं- आह चोद मेरे भाई … और कस कस के चोद दे अपनी बहन की चुत को … आह फाड़ दे अपनी बहन की चूत को … आज तेरा मन जो करे, तू वह कर ले मेरे बहन के लौड़े आह.
मैं भी फुल जोश में आ गई थी.
भाई भी फुल जोश में था ‘हां मेरी बहन, आज तेरी चूत … गांड सब फाड़ दूँगा!’
मैं- अह्ह्ह … उफ़्फ़ … ह्ह्ह … अह्ह्ह … उफ़्फ़ … मजा आ रहा है मेरे भाई… और जोर से चोद मुझे … अपनी रंडी बना ले … मैं तेरी कुतिया हूँ, रखैल हूँ!
वह- हां, तू मेरी रंडी है तुझे बीच बाजार में नंगी करके चोदूंगा … साली छिनाल … मेरी कुतिया बहन की लवड़ी!
कुछ देर चोदने के बाद उसने अपना लंड मेरी चूत से निकाला और मेरे मुँह में डाल दिया.
‘आंह… चूस मेरी रंडी, चूस इसे!’
मैं ‘उम्म्म्म … उम्म्म्म …’ करके भाई का लंड चूसने लगी.
मैं- वाह, तेरे लंड का स्वाद भी मस्त है!
अब तक मैं दो बार झड़ चुकी थी लेकिन अभी तक उत्तेजित होकर उसके लंड से चुदने के लिए मचल रही थी.
उसने अपना लंड मेरे मुँह से निकाल कर फिर से मेरी चूत में डाल दिया.
इस बार उसका लंड सटाक से अन्दर तक सरसराता चला गया.
एक हल्की-सी आह के बाद उसने जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए.
मैं ‘अह्ह … ह्ह … अह्ह्हा … ओह्ह … उम्म्म्मा हह … उफ़ … अहह्ह!’ करने लगी.
करीब 25 मिनट बाद वह मेरी चूत में ही झड़ गया और कुछ देर तक मेरे ऊपर ही पड़ा रहा.
फिर उस रात उसने मुझे चार बार चोदा था और मेरी चूत का फालूदा बना दिया था.
मैं 3 बजे उसकी चुदाई से फ्री हुई.
मैं उठी और कपड़े पहन कर बाथरूम में जाकर अपनी फटी हुई चूत को देखने लगी.
फिर उसे साफ करके मंद-मंद मुस्कुराने लगी.
फिर मैं बाहर आई और दबे पांव वृत्ति के रूम में गई.
उधर लाइट जला कर देखा तो वह नींद में सो रही थी और चाचा-चाची भी आराम से सो रहे थे.
मैंने कमरे का दरवाजा बंद करके लाइट का स्विच ऑफ किया और अपनी बहन के बाजू में सो गई.
आज मेरी चूत बहुत ज्यादा दर्द कर रही थी और उधर देवेंद्र भी सो गया.
सुबह 7 बजे तक चाचा जी और चाची जी भी उठ कर आ गए थे.
फिर वृत्ति ने चाय बनाई और चाचा-चाची को पिलाई.
उसने मुझे जगाकर मेरे बिस्तर पर ही मुझे चाय दी और देवेंद्र को भी चाय दी.
सुबह 8 बजे तक दैनिक कार्य और पूजा-पाठ से फ्री होकर वृत्ति ने नाश्ता बनाया.
वैसे भले ही वृत्ति चाचा की सगी बेटी नहीं है लेकिन उनके घर में रुतबा सगी बेटी से कम नहीं है.
उनके घर में ज्यादातर उसकी ही चलती थी तो घर में चाय बनाना या खाना बनाना आदि सब वह आराम से कर लेती थी.
ऐसा कभी नहीं लगता था कि यह देवेन्द्र के ताऊ की लड़की है.
नौ बजे चाचा जी और चाची ट्रैक्टर लेकर खेत में चले गए.
फिर वृत्ति भी घर चली गई और जाते जाते वह मुझे इशारा कर गई.
मैंने भी अपने भाई ने रोक लिया और उस दिन भाई ने पूरे दिन दोपहर तक रुक-रुक कर मेरी चार बार चुदाई की.
दोपहर को मैं भी घर चली गई ताकि घर वालों को शक न हो.
मम्मी-पापा शाम आए थे, पर तब तक उसने मेरी चूत की हार्ड फक करके खूब सेवा करके भेजा था.
मेरी चूत का तो लगभग भोसड़ा बन चुका था.
उस रात मैं देवेंद्र के घर नहीं गई थी.
देवेंद्र हमारे घर आया था और उस रात वहीं पर सोया था.
उसने मुझे वहां भी चोदा था.
उधर उसने 4 दिन तक लगातार मेरी चुदाई की.
उसके बाद उसने मुझे अपने ससुराल भेज दिया ताकि पति को किसी भी प्रकार से शक न हो.
इधर मुझे भी अपने बीज को जायज ठहराना था.
मैं उस दिन ससुराल में आकर अपने पति के सामने चुदने के लिए नंगी हो गई.
पति ने भी मेरी अच्छे से चुदाई की थी.
दो दिन के बाद मुझे ससुराल से वापस बुला लिया क्योंकि उस समय मेरी मम्मी की तबीयत थोड़ी-सी खराब थी.
तब पति ने भी जाने की इजाजत दे दी.
मुझे वापस आने पर पता चला कि यह वृत्ति और देवेंद्र का ही बनाया हुआ प्लान था, मम्मी की तबीयत इतनी ज्यादा खराब नहीं थी.
फिर मम्मी ने कहा- आ ही गई है तो कुछ दिन रुक कर चली जाना.
वैसे देवेंद्र मुझे अपनी बाइक पर ससुराल छोड़ने आया था और ले जाने भी आया था क्योंकि उसके घर से ज्यादा दूर नहीं था.
अब मैं समझ गई कि मुझे दो लंड से चुदते रहना है ताकि मेरी योजना सफल हो सके.
मैं उस रात ही देवेंद्र के घर उससे चुदने के लिए पहुंच गई थी क्योंकि उसके घर टीवी देखने का बहाना बनाना मुझे आसान सा लगा था.
उधर टीवी देखने जाती और वहीं सोने का बहाना करके रोजाना उससे चुदती.
सुबह वापस अपने घर आ जाती थी.
ससुराल से आने के बाद पहले ही दिन उसके घर गई.
पहले की तरह ही चाचा-चाची सोने के बाद भी मैं उसके रूम में टीवी देखती रही.
देवेंद्र को मेरी चुदाई शुरू करने के ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा था.
उसे मेरी चूत पसंद आ गई थी.
वह मेरे बूब्स मसलने लगा और बोला- पूनम, तेरे दूध बड़े-बड़े हो गए हैं!
मैंने हंसकर कहा- जब तेरे जैसा मर्द रात को मेरे साथ मेहनत करेगा, तो दूध और गांड दोनों को बड़ा हो जाने में समय नहीं लगता है.
मेरे भाई ने मेरे सारे कपड़े उतार कर मुझे पूरी तरह से नंगी कर दिया.
अपने लंड को खड़ा करके मेरी बुर में घुसाकर मुझे चोदने लगा.
भाई ने मुझे चोदते हुए कहा- पूनम, तेरी चूत में अब पहली रात के जैसा मजा नहीं आ रहा है!
मैं बोली- तेरे जीजा ने मुझे यहां से जाने के बाद रात और दिन भर चोदा है … मगर मेरी चूत को ढीला करने में तेरे लौड़े का ही हाथ है.
वह बोला- तो मजा दे न!
मैंने कहा- ले लो न मजा तुम जितना मजा ले सकते हो, ले लो!
वह बोला- हम्म … इस बार कितने दिन रहने आई हो?
मैं- मेरे ख्याल से तुम्हारे जीजा जी तीन दिन के बाद मुझे ले जाने के लिए आ जाएंगे. वे भी मुझे बिना चोदे नहीं रह सकते हैं. तेरे जीजा जी ने दो दिन पहले मुझे जब चोदा था, तो सारी रात मेरी चुत में ही घुसे रहे थे.
भाई ने कहा- यदि तेरा पति तुझे इतना ज्यादा चोदता है, तो तुझे माँ क्यों नहीं बना पा रहा है?
मैंने बताया- भाई, मेरे पति की डॉक्टरी जांच हुई थी. उसमें उनके शुक्राणुओं में कमी है, जिस वजह से मेरे पेट में बच्चा नहीं ठहर पा रहा है. अभी यह बात उन्हें नहीं मालूम है. डॉक्टर ने मुझे ही बताई थी.
भाई ने कुछ नहीं कहा.
उसी वक्त मेरे फोन की घंटी बजने लगी.
मैंने भाई को चुप रहने का इशारा किया और फोन पर बात करने लगी.
पति ने पूछा- क्या कर रही हो?
मैंने बताया- अपने कमरे में अकेली हूँ और आपको ही याद कर रही हूँ.
वे मेरे साथ सेक्सी बातें करने लगे.
मैंने अपने पति से कहा- हां, आपके औजार में विशेष प्रकार की ताकत आ गई है.
मेरे पति ने कहा- हां मेरी जान, तुझे खुश करने के लिए मैं मॉर्निंग में दौड़ने के लिए जाने लगा हूँ … और खाना खाने में भी चना और केला रोज खाता हूँ. रात को गाय का दूध पीकर सोता हूँ. इसलिए मेरा औजार घोड़े जैसा हो गया है.
मैंने अपने पति को किस करके कहा- आई लव यू मेरे राजा पति, आपकी चुदाई से मेरी आंखों में आंसू आ जाते हैं … लेकिन ये आंसू मेरी खुशी के होते हैं.
वे हंसने लगे और कहने लगे- यह तो अच्छा हुआ कि तुझे मायके जाना पड़ा वरना तेरी चूत भोसड़ा बन जाती और मुझे तेरी चूत चुदाई में मजा ही न आता!
मैंने कहा- अभी भी मैं चार-पांच दिन में ही वापस आ जाऊंगी. इतनी जल्दी मेरी चूत वापस टाइट नहीं हो पाएगी!
यह सुनकर वे हंसने लगे.
इसी तरह की बातें करके मैंने फोन काट दिया और अपने भाई से लिपट गई.
वह मेरी चूत को सहलाने लगा.
मैंने कहा- अब देर न करो भाई … मेरी चूत में आग लगी हुई है. जल्दी से अपना मूसल पेल दो तुमसे चुदवा कर मेरी चूत ढीली ही होनी है, टाइट नहीं हो पाएगी … इसी लिए तो मैंने तुम्हारे जीजा जी से कहा है कि मेरी चूत उनको ढीली ही मिलेगी.
मेरे भाई ने कहा- तू टेंशन मत ले, आज मैं तेरी चूत को चोद-चोदकर और बड़ी गुफा बना दूंगा!
फिर बहुत जल्दी ही मुझे खुशखबरी मिल गई कि मैं माँ बनने वाली हूँ तो सब लोग बहुत ज्यादा खुश हुए.
मैं, मेरी मम्मी-पापा, वृत्ति आदि सब खुश हुए और ससुराल में भी सब खुश हुए.
गर्भवती होने के बाद मेरे मन में ख्याल आया कि पति की मेरे प्रति इतनी ईमानदारी है, तब मैं सोचने लगी कि एक बार यह बच्चा पैदा हो जाए.
इसके बाद मैं अपने पति के लिए बिल्कुल पवित्र हो जाऊंगी और तब मैं गैर-मर्द के बारे में सोचूँगी तक नहीं.
मेरे पति मेरे लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं.
मेरी जरूरत के सब सामान और अच्छी सेक्स लाइफ के लिए रोजाना व्यायाम कर रहे हैं ताकि उनका लंड मजबूत रह सके और वे मुझे अच्छे से चोदकर खुश रख सकें.
मैं अपने पति की ईमानदारी से बहुत खुश हूँ और कभी-कभी सोचती हूँ कि पिछले जन्म में जरूर मैंने अच्छा काम किया होगा, जो मुझे देवता जैसा पति मिला है.
मैं भी उनके लिए पतिव्रता स्त्री बनकर जीवन गुजार दूँगी.
मेरे बच्चे की डिलिवरी का समय नजदीक आ रहा था.
मैं जब से पेट से हुई हूँ … तब से लेकर अब तक किसी से भी नहीं चुदी हूँ. मैं किसी चुदाई के बारे में सोचती तक नहीं हूँ.
मुझे अपने बच्चे की चिंता है.
बच्चा होने के बाद मैंने सिर्फ अपने पति से ही चुदाई की है.
पति के अलावा मेरा भाई मुझसे चुदाई करना चाहता था, पर मैंने मना कर दिया था.
बाद में मैं केवल दूसरे बच्चे के लिए एक बार और अपने भाई से चुदी थी.
अब मैं दो बच्चों की माँ हूँ और अपने जीवन में बहुत ही ज्यादा खुश हूँ.
फिलहाल मैं अपने पति के लंड के अलावा किसी अन्य का लंड अपनी चूत में नहीं लेती हूँ.
मुझे गर्भवती करने में मदद करने वाली मेरी छोटी बहन वृत्ति चौधरी को बहुत-बहुत धन्यवाद.
उसकी वजह से ही मैं आज खुशहाल जीवन जी रही हूँ और वृत्ति के बहुत मनाने पर ही मैं यह कहानी लिखने के लिए तैयार हुई थी.
बाकी मेरे जीवन में यह एकमात्र सेक्स कहानी है. इसका कोई अन्य भाग नहीं आएगा.
दोस्तो, आपको भाई के साथ मेरी हार्ड फक स्टोरी कैसी लगी है? प्लीज जरूर बताएं.
choudharyvartti@gmail.com