चूत चाट लंड चूस कहानी में मेरे घर में रहने वाली एक पर्दानशीं लड़की मुझसे चुदने को इस शर्त पर तैयार हुई कि मैंने उसकी चूत चाटूंगा और वह भी मेरा लंड चूसेगी.
दोस्तो, मेरी इस सेक्स कहानी में आप एक तलाकशुदा नर्स और मेरे बीच हुए संभोग संबंधों को पढ़ रहे थे.
कहानी के पहले भाग
तलाकशुदा पर्दानशीं नर्स को नंगी किया
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि रुखसाना मेरे साथ चुदने के लिए रेडी हो गई थी और वह मेरे सामने ब्रा पैंटी भी उतार चुकी थी और एकदम नंगी खड़ी थी.
मैं भी उसके सामने नंगा हो गया था.
अब आगे चूत चाट लंड चूस कहानी:
रुखसाना ने मेरा लंड देखा और बोली- वाह मेरे नसीब, तुम्हारा लंड कितना बड़ा है! मेरे पति का लंड बहुत छोटा था. जब वह चोदता था तो लगता था अन्दर गया ही नहीं … और वह जल्दी झड़ जाता था. मैं सेक्स की आग में जलती रहती थी! मुझे आशा है कि तुम मुझे इतनी देर तक चोदोगे कि मेरी भूख पूरी तरह शांत हो जाएगी और मुझे कई बार वीर्यपात का आनन्द दोगे!
मैंने उसे अपने आलिंगन में ले लिया और कहा- मेरी जान! मैं तुम्हें इतना चोदूंगा कि तुम खुद कहोगी कि बस अब और नहीं! वैसे भी मैंने तुम्हारी चूत पीकर तुम्हारा रस निकालना तय कर ही लिया है.
उसने मुस्कुराते हुए कहा- हां जानू! आज से पहले कभी मेरी चूत को किसी ने नहीं चूमा या चाटा … तुम पहले मर्द हो, जिसने मेरी चूत चाटकर मेरी मलाई निकालने की बात कही है. रीना कहती थी कि तुम बहुत अच्छे से चूत पीते हो और निकलने वाली चूत की मलाई पी जाते हो.
मैं चुपचाप उसे सुन रहा था, मैं उसे बेझिझक हो जाने देना चाहता था.
उसने आगे कहा- आज पहली बार है कि मैं किसी गैर-मर्द के सामने नंगी खड़ी हूँ … वह भी एक दूसरे धर्म के युवक के सामने!
मैंने जवाब दिया- मैं भी आज एक दूसरे धर्म की खूबसूरत महिला को उसके संपूर्ण गौरवशाली नग्न शरीर को देख पा रहा हूँ. मैं तुम्हारा प्रेमी होने पर खुद को धन्य महसूस कर रहा हूँ!
यह कह कर मैंने उसके हाथ खींचकर उसकी चूचियों को चूम लिया.
कुछ मिनटों तक दोनों दूध बारी बारी से चूसने के बाद वह अपनी चूचियों पर मेरे मुख का आनन्द लेती हुई कराहने लगी ‘आह्ह्ह … उफ्फ्फ … सच में मर्द का सुख कितना अलग होता है!’
रुखसाना अब पूरी तरह मस्त हो गई थी और खुलकर चुदवाने के लिए तैयार थी. उसकी सारी शर्म खत्म हो गई और वह चुदाई में खुलकर साथ देने लगी.
उसने बिस्तर पर अपनी टांगें फैलाकर मुझे चूत की तरफ इशारा किया और बोली- चलो जानू, चूत चाटने की दावत ए वलीमा में तुम्हारा स्वागत है!
वलीमा, भोज या डिनर के कार्यक्रम को कहा जाता है.
मैंने पहले उसकी टांगों के जोड़ को चूमा, फिर पिंडलियों को चाटा.
बहुत देर तक चाटने के बाद मैंने उसकी जांघों को चाटना शुरू किया तो वह तड़प गई.
उसने मेरा सिर पकड़ कर अपनी चूत की तरफ खींच लिया.
मैंने उसकी तरफ देखते हुए और उसे चिढ़ाते हुए पूछा- क्या चाहती हो?
उसने व्याकुल होकर चिल्लाते हुए कहा- प्लीज, अब और मत तड़पाओ जानू! मेरी चूत की आग को अपने होंठों से शांत करो!
चूत चाट लंड चूस कहानी को साकार करने के लिए मैंने रुखसाना की जांघें फैलाईं और उसकी चूत को अपनी जीभ की नोक से हल्के से छुआ.
उसके शरीर में एक कंपकंपी दौड़ गई!
उसने खुशी की गहरी सांस ली और अपनी जांघें ऊपर उठाकर और फैलाकर बोली- हां … ऐसे ही … और गहराई तक!
अब मुझे उसकी चूत तक पूरी पहुंच मिल गई जिस पर छोटी-छोटी झांटें थीं.
मैंने उसके बाहरी होंठों को मुँह में पकड़ कर चाटना शुरू कर दिया.
पांच मिनट तक चूसने के बाद मैंने होंठ खोले और चूत के छेद पर एक गहरा चुंबन दिया.
उसका भगनासा मेरे होंठों की पकड़ में था और होंठों से कट रहा था.
रुखसाना ने एक जोरदार कराह के साथ आवाज निकाली- आआ ह्ह्ह्ह … मर गई … आह!
उसने अति उत्तेजित अवस्था में आते हुए अपने नितंब ऊपर उठाकर अपनी चूत मेरे मुँह पर दबा दी ताकि मेरा जीभ पूरी तरह अन्दर चली जाए.
मैंने रुखसाना की चूत के बाहरी होंठों को फैलाया और उसके अन्दर के गुलाबी मांस को चाटा.
वह पूरी तरह गीली हो चुकी थी और उसका रस मलाई जैसे गाढ़े रंग का बाहर निकल रहा था.
मेरी जीभ पर सेक्सी गंध और मीठा स्वाद फैल रहा था.
मैंने अपनी जीभ को अन्दर तक धकेल दिया और जीभ से उसकी चूत को चोदा.
रुखसाना मीठे आनन्द से छटपटा रही थी और परमानंद में अपना सिर इधर-उधर हिला रही थी.
यह उसकी पहली बार चुत चुसवाने का अनुभव था और यह जन्नती अहसास था.
मैंने अपनी जीभ को उसके भगनासे पर ले जाकर उसे होंठों से चबाना शुरू कर दिया.
इससे उसका पूरा शरीर हिल गया.
उसने अपना ऊपरी शरीर उठाया, मेरे बालों को हाथों में कसकर पकड़ा और मुझे अपनी ओर धकेल दिया.
मुझे सांस लेने में भी मुश्किल हो रही थी.
मेरी नाक उसकी नाभि के ठीक नीचे, पेट के निचले हिस्से में दब गई थी.
अगले ही पल वह सिहर उठी और अपने गाढ़े रस की धार मेरे मुँह में छोड़ने लगी!
ऐसा लग रहा था मानो वह पेशाब कर रही हो.
जब वह पृथ्वी को चकनाचूर कर देने वाले संभोग सुख से थक गई, तो वह लेटी रही और जोर-जोर से सांसें ले रही थी. उसकी चूचियां ऊपर-नीचे हो रही थीं.
वासना के प्रभाव से उसकी जांघें कांप रही थीं, उसका पेट हर सांस के साथ फूल रहा था, पूरे शरीर से पसीना बह रहा था.
रुखसाना की आत्मा की गहराई से उठने वाले विस्फोटक संभोग सुख ने उसकी सारी ताकत खत्म कर दी थी.
जब रुखसाना सामान्य हुई, तो उसकी सांसें धीमी हो गईं, कंपकंपी बंद हो गई और वह आंखें बंद करके लेटी रही.
मैं उसकी जांघों के बीच से हट गया और उसकी ऊंची-कसी हुई चूचियों के ठीक नीचे, उसकी छाती पर अपना हाथ रखकर उसके पास लेट गया.
उसने अपनी आंखें नहीं खोलीं.
कुछ देर बाद मैंने अपनी उंगलियों से उसके गहरे भूरे रंग के निपल्स के चारों ओर … और बगलों तक गोल-गोल घुमाते हुए उसकी चूचियों को हल्के से सहलाना शुरू कर दिया.
रुखसाना एक बार फिर उत्तेजित होने लगी.
उसने मेरी तरफ घूमकर आंखें खोलीं, मेरे मुँह को हल्के से चूमा और फुसफुसा कर बोली- इस अद्भुत अनुभव के लिए धन्यवाद, मेरी जान!
मैंने कहा- तुम्हारे लिए कुछ भी करूंगा मेरी जान!
इस बार रुखसाना ने मुझे कसकर गले लगा लिया और मेरे होंठों पर एक लंबा चुंबन दिया.
मेरे होंठ उसकी चूत के रस से अभी भी सने हुए थे.
उसकी चूचियां मेरी छाती से चिपक गईं, उसकी एक जांघ मेरी कमर पर चढ़ गई.
मेरा खड़ा लंड उसकी गीली चूत को छू रहा था.
रुखसाना ने अपनी चूत को मेरे लंड पर रगड़ते हुए कूल्हों को हिलाना शुरू कर दिया.
उसका चेहरा एक खिली मुस्कान से चमक उठा और आंखों में और अधिक चुदाई की लालसा झलकने लगी.
रुखसाना अब पांच साल बाद एक मर्द के लंड के साथ अपनी पहली चुदाई के लिए पूरी तरह तैयार थी.
वह अपनी चुत को फाड़ने वाले एक असली बड़े लंड के साथ पूर्ण अनुभव के लिए तरस रही थी.
उसने अपनी जांघें चौड़ी करके मुझे चुदाई के लिए आमंत्रित किया.
वह बोली- आओ जानू … अब मुझे पूरी तरह चोदो!
रुखसाना ने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और व्याकुल होकर बोली- जानू, अब और मत तड़पाओ … जल्दी से अपना लंड मेरी चूत में डालो और मुझे चोदकर जन्नत की सैर कराओ मेरे मालिक!
मैंने उसे एक लंबा, गहरा जीभ-चुंबन दिया और कहा- अभी लो मेरी जान! मैं तुम्हें अपने लंड का स्वाद चखाता हूँ और जन्नत दिखाता हूँ.
यह कहते हुए मैं उसकी जांघों के बीच बैठ गया और उसकी गीली चूत को अपने लंड के सुपारे से रगड़ने लगा.
मैंने उसकी चुत मणि को रगड़ा, जिससे उसने सिहर कर विनती सी की- आह अब और मत तड़पाओ मेरी जान … अन्दर डाल अपना लंड और चोद दो जालिम … मैं कब से लंड के लिए तरस रही हूँ और तू मेरे जज़्बात नहीं समझ रहा!
मैंने मुस्कुराते हुए कहा- क्यों घबरा रही है जानू? ये लो लंड का स्वाद चखो!
इतना कहकर मैंने अपना आधा लंड रुखसाना की चूत में उतार दिया.
वह दर्द से तड़प गई और चीखी- साले! इतनी बेरहमी से घुसेड़ रहा है! मेरी तो चूत फट गई!
मैं अपना लंड रुखसाना की चूत में रखकर उसके ऊपर लेट गया और उसकी चूचियों के साथ खेलने लगा, उसके मुँह को चूमने लगा, उसकी जीभ चूसने लगा.
वह अब और अधिक उत्तेजित हो गई और बोली- अब धक्के मारो … चोदो मुझे … आह अपना पूरा लंड उतार दो मेरी चूत में!
यह सुनते ही मैंने रुखसाना को धकापेल चोदना शुरू कर दिया, अपने लंड को उसकी चूत में धकेलते और बाहर खींचते हुए चोदने लगा.
मैंने स्ट्रोक्स की गति बढ़ा दी.
रुखसाना जोर-जोर से कराह रही थी- हम्म्म … ओह्ह … ओह्ह … आह्ह … आह्ह … आह्ह … और जोर से चोद … मैं झड़ने वाली हूँ … मेरी मलाई निकलेगी अभी मेरी जान तेज तेज चोद मुझे आह धक्के और जोर से!
इतने में रुखसाना झड़ना शुरू हो गई और मुझसे चिपक गई.
उसने अपने पैर मेरी कमर को जकड़ लिया और झड़ने लगी.
उसकी चूत का गाढ़ा रस मेरे लंड को अपने में डुबोता चला गया और एक तरह से चुत रस ने मेरे लौड़े को भिगो दिया.
मेरी जांघें भी भीग गईं.
रस उसकी चूत से बहकर उसकी गांड की दरार में जाने लगा.
कुछ देर बाद वह ठंडी हो गई.
रुखसाना के झड़ने के बाद मैं कुछ देर उसके ऊपर ही पड़ा रहा.
मेरा लंड अब भी उसकी चूत में फँसा हुआ था.
कुछ देर बाद वह हटी और मुझे मेरी पीठ पर लिटा दिया और जोर से चूमा.
मैंने उससे पूछा- जान, मैं अभी बाकी हूँ, क्या मैं चुदाई जारी रखूँ?
उसे अचानक से मेरे लंड के स्खलन की याद आई और उसने हां कहा.
मैंने पूछा कि रस कहां चाहती हो कि मैं किधर झड़ूँ … चूत में या बाहर?
उसने कुछ सेकंड सोचा और बोली- मैं बहुत लंबे समय बाद चुदाई कर रही हूँ, इसलिए मेरी चूत में ही वीर्य गिराओ! मैं गर्भधारण रोकने के लिए गोलियां ले लूँगी!
फिर मैंने उसे फिर से चोदना शुरू कर दिया.
उसके दोनों पैर उठाकर अपने कंधों पर रख लिए और अपने लंड से जोरदार धक्का दिया!
हम दोनों ने सात आठ मिनट तक और चुदाई की और वह वापस अपने स्खलन पर आ गई.
उसने तेजी से कहा- आह मैं झड़ने वाली हूँ.
मैंने कहा- रुक जा मेरी जान … मेरा माल भी निकलने वाला है. हम दोनों साथ झड़ेंगे!
फिर मैंने उसे कुछ जोरदार झटके दिए और हम दोनों झड़ना शुरू कर दिए!
हमारा काम रस आपस में मिल गया और उसकी योनि से बाहर बहने लगा.
मेरा लंड मेरे वीर्य और उसके रस में समा गया.
हम दोनों चुपचाप आलिंगनबद्ध होकर हांफते हुए, आंखें बंद करके अभी-अभी संपन्न हुई अंतरंग, जोशीली चुदाई का स्वाद ले रहे थे.
दस मिनट तक एक-दूसरे की बांहों में लेटे रहने के बाद हम उठे.
उसकी चूत से मेरा वीर्य और उसका रस निकलने लगा.
पूरी बेडशीट हमारे वीर्य और पसीने से भीग गई थी.
वह शर्मा रही थी और खुद को साफ करने के लिए बाथरूम में चली गई.
मैं उसके पीछे चला गया.
हमने एक-दूसरे की चूत और लंड को प्यार से साफ किया और साथ में नहाए.
फिर एक-दूसरे को तौलिये से पौंछा और वापस आकर कपड़े पहने.
उसने मुझे एक जोरदार चुंबन दिया और बोली- तुमने मेरे जीवन का सपना पूरा कर दिया … धन्यवाद डार्लिंग!
इसके बाद हम दोनों की चुदाई लगभग रोजाना होने लगी थी.
आपको मेरी चूत चाट लंड चूस कहानी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.
sureshkumarthakur040@gmail.com