जवान बहन बूब प्ले स्टोरी में मेरी कई बहनें हैं चचेरी और सगी. मैं सबके साथ वासना भरी मस्ती करना चाहता था. एक रात मैंने एक बहन की चूचियों को मसला तो वह जाग गयी.
दोस्तो, मैं पवन आपको अपनी बहन के साथ सेक्स कहानी को सुना रहा था.
कहानी के पहले भाग
बहन की चूत में उंगली डाली
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि मैंने रात को अपनी बहन की चुत में उंगली करके उसकी कुंवारी चुत को टटोल लिया था और उसने कोई विरोध भी नहीं किया था.
अब आगे जवान बहन बूब प्ले स्टोरी:
मेरी बहन ने मुझसे कुछ कहा नहीं था लेकिन तब भी मैंने आगे उसके साथ सेक्स करने का विचार त्याग दिया था.
मुझे अपनी वह बहन चुदाई के लिए सही लगी थी, जिसने मेरे साथ बैठ कर ब्लू-फिल्म देखी थी.
इसके बाद मैं चाचा की बेटी के बारे में सोचने लगा. मैं अब हमेशा उस पर नजर रखता था.
वह सलवार कमीज़ पहनती थी, पर घर में रहने पर दुपट्टा नहीं डालती थी … जिससे उसके बड़े-बड़े गोल-गोल मम्मे हमेशा ऊपर से दिखते रहते थे.
जब भी वह झुककर कोई काम करती, जैसे बर्तन धोना, झाड़ू लगाना … तो मस्त दूध दिखने लगते थे.
मैं ना चाहते हुए भी सामने आ ही जाता और उसके मम्मों को गौर से देख लेता.
वह भी शायद इस बात को समझ चुकी थी कि मैं उसके मम्मों को घूरता हूँ, पर कभी-कभी वह कपड़े ठीक करती या कभी वैसे ही रहती.
अब जैसा कि आपको मैंने पिछली कहानी में बताया था, मेरे घर में तीन रूम थे.
जिसमें सबसे आगे बरामदा था, फिर दो बेडरूम. उसके बाद आंगन.
उस आंगन में ही एक रूम और एक किचन था.
ठंडी के मौसम में मैं पिछले वाले रूम में सोता था.
आंगन में एक दरवाजा था जो दोनों रूम को जोड़ता था.
एक बार मुझे रात को कुछ लेना था, पर वह दरवाजा बंद था.
इसलिए मैंने दरवाजा खुलवा कर वह चीज़ मैनेज की.
उसके बाद से मैंने घर में कहा कि ये दरवाजा खुला ही रखो. जब मैं सोने जाऊंगा तब मैं बोल दूँगा बंद करने को.
उसके बाद से कुछ दिन तो बंद करने के लिए कोई आ जाता था.
पर कुछ दिन बाद ठंडी के कारण कोई रजाई से निकलना नहीं चाहता था.
इसलिए आंगन के पास जो दूसरा रूम था, उसमें मेरे चाचा की बेटी अकेली सोती थी.
मैंने मां से कहा कि जब मुझे सोना होगा तो मैं दरवाजा बंद करने को बोल दूँगा क्योंकि ये पास में थी और रात को ज्यादा जोर से बुलाना भी नहीं पड़ेगा.
इसलिए वे मान गईं.
कुछ दिन तक सब ठीक चलता रहा.
जब भी मैं सोने जाता, उसे बोल देता और वह दरवाजा बंद कर देती.
मेरे आंगन में एक खिड़की थी जो बहन के रूम में खुलती थी.
कुछ दिन बाद कभी-कभी मैं देर रात तक पढ़ता रहता था.
फिर जब सोने जाता तो देखता मेरी बहन भी सो गई है.
कभी-कभी तो वह थोड़े आवाज़ देने पर जाग जाती थी.
पर जब वह जल्दी सो जाती तो गहरी नींद में होने के कारण नहीं उठती थी.
तो मैं उसे उठाने के लिए कुछ सोचने लगा.
रात होने के कारण मैं ज्यादा जोर से बोल नहीं सकता था और उसका दरवाजा बंद होने के कारण अन्दर भी नहीं जा सकता था.
इसलिए मैंने एक डंडा लिया जो कि थोड़ा लंबा था.
खिड़की से कुछ दूरी पर उसका बेड था जिस पर वह सोई थी.
मैं उसे डंडे से थोड़ा-थोड़ा हिलाकर जगाया करता था.
पर उससे भी उसे कुछ पता नहीं चलता था.
तब मेरे दिमाग में शैतान जाग गया.
मैं अब थोड़ा और देर तक पढ़ने लगा.
मैं जानता था कि लेट करने से अब वह ज्यादा गहरी नींद में हो जाएगी … और हुआ भी ऐसा ही.
जब मैं उसे डंडे से हिलाता तो वह नहीं उठती.
फर मैं डंडे से ही उसके चूचों को दबा देता, तब भी नहीं उठती
अब धीरे-धीरे मेरी हिम्मत बढ़ती गई.
एक दिन मैंने उसकी नाइटी को डंडे से ऊपर किया. तो मुझे उसकी पैंटी दिख गई.
मैंने धीरे-धीरे नाइटी को उसकी कमर तक खींच दिया ताकि उसकी चूत को देख सकूँ.
फिर उसकी चूत को पैंटी के ऊपर से ही डंडे से दबाने लगा.
दोस्तो, मुझे पता नहीं कि वह ये जानबूझ कर करती थी या सच में उसे इतनी गहरी नींद आती थी.
पर मैं इसका पूरा फायदा उठा रहा था.
मैंने कितनी ही कोशिश की, पर उसके पैंटी को नहीं हटा सका.
पर ऐसा करके भी मुझे बहुत मज़ा आता था
फिर कभी अचानक वह उठ जाती थी, तो मैं उसे बोलता था- दरवाजा बंद कर लो!
वह उठकर दरवाजा बंद कर देती थी.
पर ये बात किसी को नहीं बताती क्योंकि वह मेरे बारे में जान चुकी थी या शायद उसे भी अच्छा लगता था.
कुछ दिन ऐसा ही चला.
मैं अब रोज़ डंडे से उसे छेड़ देता था.
पर कुछ दिन बाद उसने खिड़की बंद करना शुरू कर दिया.
फिर मैं आवाज़ देकर ही बुलाने लगा.
मैंने देखा कि खिड़की में एक छोटा सा छेद है. उससे भी मैं उसको रात में देखा करता था.
वह रात को रूम की लाइट ऑन करके ही सोती थी.
पर बाद में शायद उसे ये भी पता चल गया कि मैं छेद से उसे देखता हूँ तो उसने अन्दर से छेद के सामने कपड़ा डाल दिया, जिससे दिखना बंद हो गया.
ऐसा करने के बाद भी हम बातचीत नॉर्मल ही करते थे.
इसलिए किसी को कोई शक नहीं था.
फिर गर्मी का मौसम आ गया और मैं बाहर बरामदे में सोने लगा.
मेरा एक घर गांव में भी है जहां खेती है.
वहां लोग कुलदेवता की पूजा के लिए भी जाते हैं.
एक बार की बात है, मेरे दादा-दादी लोग कुलदेवता की पूजा में पहले ही घर चले गए थे.
बारिश का मौसम था इसलिए कोई सवारी मेरे गांव तक नहीं जाती थी.
इसलिए मेरे दादा-दादी ने कहा कि सब कोई तो नहीं आ सकता है, इसलिए जो लोग बाइक से आ सकते हैं, वे आ जाएं.
फिर मैंने कहा कि मैं, मेरी सगी बहन और चाचा की बेटी तीनों बाइक से चले जाते हैं.
इस पर मेरे मम्मी-पापा ने भी हां कर दी.
फिर पूजा वाले दिन मैं बाइक से दोनों बहनों को बैठाकर जाने के लिए तैयार हुआ.
मेरी सगी बहन पतली थी और चाचा की बेटी थोड़ी मोटी थी.
फिर उन दोनों ने ही फैसला किया कि मेरे चाचा की बेटी बीच में बैठेगी और मेरी छोटी सगी बहन पीछे बैठेगी.
मैं भी यही चाह रहा था. जैसे मेरे मन की मुराद पूरी हो गई हो मैं बहुत खुश था.
फिर बाइक स्टार्ट करके मैं चल दिया.
क्योंकि तीन लोग थे इसलिए मुझे आगे खिसक कर बैठना पड़ता था.
कुछ दूर चलने के बाद जब रास्ते में कुछ गड्ढे आए, जिसमें बाइक में ब्रेक लगाना पड़ रहा था.
मेरी बहन के मस्त-मस्त चूचे मेरी पीठ से टकराते थे जिससे मुझे बहुत मज़ा आने लगा था.
रास्ता ज्यादा खराब होने के कारण बार-बार ऐसा हो रहा था.
ऐसा होने के कारण मेरे लंड में तनाव आना शुरू हो गया और मेरे दिमाग में सेक्स आना शुरू हो गया.
अब मैं जानबूझ कर थोड़ा पीछे को खिसक गया और अपनी बहन के मम्मों को पीठ से दबाने लगा.
उसे भी ये महसूस हो रहा था कि मैं जानबूझ कर दबा रहा हूँ.
पर उसने कुछ बोला नहीं और ना ही ये बात मेरी पीछे बैठी सगी बहन को पता चलने दी.
खैर, ऐसे करते-करते काफी दूर निकल गए.
अचानक से तेज़ में बारिश शुरू हो गई.
पर आसपास छुपने के लिए कोई जगह नहीं थी इसलिए मैं तेज़ी से बाइक चलाने लगा.
फिर थोड़ी देर में बारिश और तेज़ हो गई.
तब तक हम एक दुकान के पास पहुंच गए थे.
मैंने बाइक जल्दी से रोकी और सब उतर कर दुकान में पानी से बचने के लिए खड़े हो गए.
पर तब तक तो हम सब आधे भीग चुके थे.
फिर मैंने कहा- अब हम तो भीग ही चुके हैं, तो यहां ज्यादा देर रुकने का कोई फायदा नहीं है. क्योंकि शाम भी होने वाली है.
ऐसी जैसे ही बारिश थोड़ी धीमी हुई, मैं वहां से फिर सबको लेकर निकल पड़ा.
मुझे वहां से जल्दी जाने का एक और कारण भी था.
क्योंकि दुकान पर पहले से भी काफी लोग थे जो बारिश में छुपे थे.
वे सब मेरी बहन के भीगे कपड़ों के अन्दर से उसके बड़े-बड़े मम्मों को देख रहे थे.
वह मुझे अच्छा नहीं लग रहा था.
पर जब मैंने भी इस बात पर ध्यान दिया तो मेरा दिमाग़ भी ठनक गया.
मैंने देखा मेरी बहन के दोनों गोल-गोल बड़े-बड़े मम्मे कपड़ों के ऊपर से साफ़ दिख रहे हैं.
उनके रंग तो नहीं दिख रहे थे, पर आकार पूरे उभर कर आए थे.
जिसे देखकर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया.
मैंने सबकी नज़र छुपाकर अपने लंड को पैंट में ठीक किया और वहां से चल दिया.
जैसे-तैसे भीगे हुए हम गांव के घर पहुंचे.
फिर कपड़े बदले, अपने आप को सुखाया.
फिर पूजा हुई, सब खाकर सो गए.
कल सुबह फिर हम वहां से वापस आ गए.
पर इस बार मेरी बहन ने मेरी सगी बहन को बीच में बैठाया, जिससे अब कुछ नहीं हुआ और मैं सीधा घर आ गया.
घर आने के बाद अब मैं हमेशा उसके चूचों के बारे में सोचता था.
सोचता था कि कब मौका मिले जब मैं उसे दबा दूँ.
ऐसी तरह कुछ दिन बीत गए.
अब मैं फिर बरामदे में सोता था, वही रात को पढ़ता था.
एक बार मेरे मम्मी-पापा पिछले वाले रूम में सोए थे.
मेरी चाचा की बेटी और मेरी छोटी सगी बहन एक साथ बीच वाले रूम में … और आगे वाले रूम में मेरी बड़ी बहन सोई थी.
मैं रात को देर तक पढ़ाई कर रहा था.
उस दिन मुझे मेरे दोस्त ने एक सेक्स स्टोरी की बुक दी थी.
मैंने देखा कि सब सो गए हैं तब मैंने वह किताब निकाली और अपनी बुक में छुपाकर पढ़ने लगा.
उस कहानी को पढ़कर मेरा लंड पूरा तनकर खड़ा हो गया था और मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था.
बस मन कर रहा था कि कोई मिल जाए जिसे जी भरकर चोद डालूँ … पर कोई था ही नहीं.
फिर मेरे दिमाग में आइडिया आया.
मैंने देखा कि गर्मी होने की वजह से सबने अपने दरवाजे खोलकर सोए हैं.
मुझे भी बहुत गर्मी लग रही थी इसलिए मैंने सिर्फ़ टॉवल और चड्डी ही पहनी थी जिसमें मेरा लंड उभर कर खड़ा था.
मैंने सोचा कि आज कुछ भी हो जाए, मगर आज मैं बहन की चूचों को ज़रूर दबाऊंगा!
ये सोचकर मैं उसके रूम की तरफ बढ़ने को तैयार हुआ.
फिर मैं रुका और सोचा- अगर किसी ने देख लिया तो क्या करूँगा?
फिर मैंने देखा कि आंगन में जाने के लिए दरवाजे के पास एक लाइट है, जिसका स्विच बहन के रूम में ही है, जो आज ऑफ था.
ऐसा अक्सर होता था. अगर शाम को लाइट नहीं रहती तो लोग ऑन करना भूल जाते थे.
इसी का फायदा आज मैं उठा रहा था.
उस लाइट का स्विच बहन के बेड के दूसरी तरफ था, जिसे ऑन करने के लिए बेड पर चढ़कर जाना पड़ता था.
मैंने भी सोच लिया, अगर कोई देखेगा तो बोल दूँगा लाइट ऑन करने आया था.
मैं जानता था कि बहन लाइट के स्विच की तरफ सोती थी और मेरी सगी बहन उसके आगे सोती थी.
फिर मैं ये सोचकर दबे पांव से उस रूम की तरफ बढ़ा.
रूम में काफी अंधेरा था जिससे कोई कुछ नहीं देख सकता था.
मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था.
डर भी लग रहा था, पर दिमाग में सेक्स का भूत भी था.
इसलिए मैं ज्यादा ना सोचते हुए बेड के साइड से चढ़ गया और बहन के बगल में जाकर लेट गया.
मैंने देखा कि किसी को कुछ पता नहीं चला.
फिर मैंने ज्यादा टाइम ना गँवाते हुए अपना हाथ सीधा बहन के चूचों पर रख दिया.
और अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था.
मैंने उसके मम्मों को दबाना शुरू कर दिया.
शायद मैं ज्यादा जोश में था इसलिए मैंने ज़ोर-ज़ोर से दबा दिया.
जवान बहन बूब प्ले से इतने में मेरी बहन जाग गई.
वह कुछ बोलती, इसके पहले मैंने अपने हाथ से उसके मुँह पर रख दिया और धीरे से उसके कान में बोला- चुप रहो प्लीज़, थोड़ी देर करने दो!
इस पर उसे कुछ समझ नहीं आया, पर उसने कोई आवाज़ नहीं की.
मैं भी उसके मम्मों को दबाता रहा.
शायद उसको भी मज़ा आ रहा था.
थोड़ी देर दबाने के बाद, क्योंकि मैं पहले से ही ज्यादा जोश में था इसलिए मेरा पानी निकल गया जो मेरे चड्डी में ही निकल गया.
दोस्तो, आपको तो पता ही है, जैसे पानी निकलता है उसके बाद होश आता है.
ठीक वैसे ही मेरा भी हाल हुआ.
जैसे ही मेरा पानी निकला, मुझे लगा कि ये मैंने क्या कर दिया, कैसे अपनी बहन की चूचों तक पहुंच गया.
अब तो मैं जल्दी से वहां से भागना चाह रहा था ताकि किसी को पता ना चले.
इसलिए मैं जल्दी से उठा और बेड से उतरने लगा.
पर इतने में मेरी सगी बहन जाग गई.
अंधेरा होने के कारण वह डर गई.
इसके पहले कुछ बोलती, मैंने बोला- मैं हूँ, लाइट ऑन करने आया हूँ!
इस पर वह चुप हो गई.
पर शायद उसे पता चल गया था कि मैं पहले से ही बेड पर था.
थोड़ी आवाज़ हुई थी इसलिए मेरे मम्मी-पापा भी जाग गए.
मैं तो वहां से भागा और अपने बेड पर आकर सो गया.
मेरी तो गांड फटी हुई थी कि आज पता नहीं क्या होगा.
पर किसी ने कुछ नहीं कहा.
फिर मैंने सोचा कि शायद रात है इसलिए कुछ नहीं बोला. सुबह सब मुझे डाँटेंगे.
पर सब कोई सब कुछ जानते हुए भी मुझे कुछ नहीं कहा.
पर इस घटना के बाद अब उस रूम का गेट बंद होने लगा.
इससे मैं समझ गया कि सबको पता चल गया है. तब से मैं अपनी बहन से आंख भी नहीं मिला पाता हूँ.
अब उसकी शादी हो गई है, पर अब भी मैं उसे चोदने की सोचता हूँ कि काश कभी मौका मिल जाए.
पर अभी तक ना मैं उससे नज़र मिलाकर बात करता हूँ, ना वह मुझसे.
तो दोस्तो, आपको मेरी सच्ची जवान बहन बूब प्ले स्टोरी कैसी लगी?
मुझे मेल करके बतायें.
pavanmatro2@gmail.com